Wednesday , December 13 2017

कलिमा तय्यबा (kalma tayyaba) की बुनियाद पर मुस्लमानों को मुत्तहिद होने की तलक़ीन

मुस्लिम दानिश्वर एन फ़ोर्म की जानिब से महबूबनगर के टाउन हाल में जलसा मीलाद-उन्नबी स्०अ०व्० का इनइक़ाद अमल में आया जिस की निगरानी माहिर-ए-तालीम अल्हाज अज़हर हुसैन जवाइंट एडीटर हफ्तावार तेलगु अख़बार मलपो ने की । जलसा का आग़ाज़ हाफ़िज

मुस्लिम दानिश्वर एन फ़ोर्म की जानिब से महबूबनगर के टाउन हाल में जलसा मीलाद-उन्नबी स्०अ०व्० का इनइक़ाद अमल में आया जिस की निगरानी माहिर-ए-तालीम अल्हाज अज़हर हुसैन जवाइंट एडीटर हफ्तावार तेलगु अख़बार मलपो ने की । जलसा का आग़ाज़ हाफ़िज़ मुहम्मद इलयास की करात कलाम पाक से हुआ ।

इस के बाद सज्जादा नशीन दरगाह शरीफ़ जड़चरला मौलाना हसन बिन अबदुल्लाह चिशती बाबा ने नाअत पेश की । मुहतरमा साजिदा सिकन्दर सदर मुस्लिम दानिश्वर इन फ़ोर्म महबूबनगर ने मेहमानों का इस्तेक़बाल किया।जलसा को मुख़ातिब करने वालों में जनाब हामिद शुतारी , ख़्वाजा , ऐम हुसैन ख़ामोशी , हसन बिन अबदुल्लाह चिश्ती बाबा और सैयद शाह तारिक़ कादरी ऐडवोकेट वग़ैरा शामिल थे।

इन मुक़र्ररीन ने मीलाद-उन्नबी स्०अ०व्० की शान-ओ-अज़मत पर तफ़सीली रोशनी डाली। जनाब हसन बिन अबदुल्लाह चिशती बाबा ने अपनी तवील तक़रीर में मश्वरा दिया कि मुस्लमान कलिमा तैयबा की बुनियाद पर एक हो जाएं । क़ौमी यकजहती पर अमल करें । दूसरों के ऐबों पर पर्दा डालें । मुस्लमानों में घोड़े जोड़े का रस्म अब आम हो गई है इस ताल्लुक़ से उन्हों ने मुसलमान महबूबनगर से दर्दमंदाना अपील की कि वो हमारे नबी स्०अ०व० की सुन्नत पर अमल करके शादी को सादी बनाए ।

निगरान जलसा अल्हाज अज़हर हुसैन ने मुख़ातिब करते हुए हज़रत मुहम्मद स्०अ०व्० की सुन्नत पर अमल करने की ख़ाहिश की और कहा कि रसूल पाक की मुहब्बत ही अल्लाह की मुहब्बत है और अल्लाह से मुहब्बत से ईमान की तकमील होती है । उन्हों ने मज़ीद कहा कि हमारा काम दूसरों को इस्लाम पहूँचाया जाए चाहे वो मुस्लिम हो या ग़ैर मुस्लिम हो ।

जलसा के इख़तेताम पर नाअतिया मुक़ाबला का प्रोग्राम शुरू हुआ । इनाम के मुस्तहक़्क़ीन सफ़ोफ़ा सुलताना , हाफ़िज़ इलयास और सय्यद साबिर कादरी क़रार दिए गए और उन्हें इनामों से नवाज़ा गया । इस महफ़िल में जनाब ख़िज़र बिन सिद्दीक़ सदर मुस्लिम दानिश्वर इन जड़चरला हादी बिन सिद्दीक़ मौलाना मुहम्मद इलयास ख़तीब जनाब अज़ीम , मौलाना हबीब वग़ैरा मौजूद थे ।

आख़िर में हाफ़िज़ साबिर के सलात-ओ-सलाम के साथ जलसा का इख़तेताम अमल में आया । मुहतरमा साजिदा सिकन्दर ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए ।

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