कश्मीर में जनता के पास नहीं है मौलिक अधिकार -पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल मोरारका

कश्मीर में जनता के पास नहीं है मौलिक अधिकार -पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल मोरारका
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पूर्व केंद्रीय मंत्री कमल मोरारका ने सोमवार को कहा की अगर नई दिल्ली कश्मीर का मुद्दा नहीं सुलझा पायी तो वहां की स्तिथि काबू में नहीं रह पाएंगी, और साथ ही कमल ने भारत सरकार पर कश्मीर के लोगों की सामाजिक आजादी का हनन करने का दोषी ठहराया।

पूर्वी राज्य सभा सदस्य मोरारका ने एक न्यूज़ कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मैं कश्मीर की यात्रा के दौरान हैरान था। वहां की जनता के लियव कोई लोकतंत्र कोई अधिकार नहीं बचे हैं। जहां बल का इस्तेमाल जनता की आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा हो वहाँ पर आप शांति का स्पष्टीकरण नहीं कर सकते हैं। विशेष् अधिकारों के बावजूद भी कश्मीर आज राज्य और केंद्रीय सरकारों के गलत प्रस्तावों से जहन्नुम बना दिया गया है।

मोरारका सभ्य समाज सदस्यों के प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष के तौर पर कश्मीर में लोगो के अलग अलग विचार जानने और उनसे बातचीत करने कश्मीर गए थे।

पूर्व मंत्री का कहना है कि कश्मीर को उसकी समस्या का हल चाहिए, अगर भारत ये नहीं कर पायगा तो वहां के हालत काबू से बाहर हो जायेंगे। थोड़ा मुड़ कर 1947 की तरफ अगर एक बार देखा जाए और आर्टिकल 370 को उसकी मूल विधि में रख कर देखा जाये तो भारत सरकार कश्मीरियों का दिल और दिमाग जीतने में पूरी तरह से असफल रही है। मंत्री आगे कहते है कि दमनकारी नीतियां फ़ौरन खत्म की जानी चाहिए और वहां के लोगो को अपंग बनाना, मारना और अँधा करना फ़ौरन बंद किया जाना चाहिए।

यह भारत के लिए बहुत शर्म की बात है कि अस्सी साल के व्यक्ति सईद अली गिलानी को उसके घर में धार्मिक एकत्रीकरण तक करने नहीं दिया जा रहा है।जब हम लोग डेलीगेशन में भारतीय लोकतंत्र की बात कर रहे थे तो कश्मीर के लोग हंस रहे थे

नई दिल्ली कश्मीर के लोगो को उकसाने का प्रयास करती है, नई जनरेशन इस के पूरी तरह खिलाफ है। भारतीय मीडिया की सबसे बड़ी बेवकूफी है वो कहती है पत्थर फेंकने वालो को पैसा दिया जाता है।
इसी दौरान हुर्रियत समूह के द्वारा लिखित व्यक्तव्य ज़ारी किया गया था।हुर्रियत के चेयरमैन सईद अली शाह गिलानी डेलीगेशन को बताते हैं कि भारत की जनता को कश्मीर के असल हालातों के बारे के कुछ पता नहीं है।

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