Sunday , January 21 2018

क़ादियानियों के लिए ‘अहमदी’ शब्द का इस्तेमाल न किया जाए: देवबंद का मीडिया से अपील

देवबंद: हाल के दिनों में मुसलमान जहां राजनीतिक समस्याओं में घिरे हुए हैं इस दौरान उनके साथ एक राजनीतिक बाजीगरी यह भी रही है कि गैर मुस्लिम समुदाय को मुसलमानों के नाम से बढ़ावा दिया जा रहा है और सबसे अधिक अफसोस की बात यह है कि कभी-कभी अनजाने मुसलमान ही इस साजिश का उपकरण बन रहे हैं। हाल के दिनों में क़ादियानियत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ कृत्रिम तौर इस्लामी पहचान युक्त कुछ ऐसे संस्थान गठन किये हैं जो क़ादियानियत की रक्षा के लिए काम कररे हैं. देवबंद के मौलाना शाह आलम ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अपील की है कि वे क़ादियानियत के लिए ” अहमदी ” शब्द का इस्तेमाल न करें.

Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये

बसीरत ऑनलाइन की खबरों के अनुसार इन संस्थाओं का पहला काम क़ादियानियत के लिए शब्द ” अहमदी” का उपयोग और उनके इबादत गाह ” मिर्ज़ाड़ा” के लिए मस्जिद का उपयोग किया जा रहा है। इसमें पड़ोसी देश के कुछ समाचार एजेंसियां ने भी उसी को लोकतंत्र के नाम पर ओढ़ना बिछौना बनाई हुई हैं। इन सब विचारों का व्यक्त दारुल उलूम देवबंद के विभाग ” अखिल भारतीय मजलिस संरक्षण नुबुव्वत” के उप प्रशासक मौलाना शाह आलम गोरखपुरी ने किया।

मौलाना ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से अपील की है कि वे क़ादियानियत के लिए ” अहमदी ” शब्द का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे न केवल यह कि मुसलमानों की दिल आज़ारी होती है बल्कि इस घृणित राजनीति की आड़ में मुसलमानों की अधिकार का हनन भी होता है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैर मुस्लिम संयुक्त उन्हें मुसलमान समझ बैठती हैं जबकि कादियानी अपने नापाक और कुफ्रिया विचारों की वजह से न कभी मुसलमान थे और न आगे कभी हो सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि किसी ने उन्हें इस्लाम से निकाला है बल्कि उनके कुफरिया और नापाक विचारों के स्पष्ट हो जाने के बाद शुरू से ही दुनिया भर के मुसलमानों ने उन्हें इस्लाम के दुश्मन ताकतों का उपकरण कार और इस्लाम से खारिज माना है. काद्यानियों की इस अवैध राजनीति कि प्रतिनधित्व में घोषित रूप से अपराधी कौम कर रही हैं इस संदर्भ में भारतीय मीडिया को इसका हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

TOPPOPULARRECENT