Wednesday , December 13 2017

क़ादियानीयों का जुबा क्या हुव‌ जानवर मुस्लमानों केलिए हलाल नहीं उल्मा एकराम

मजलिस तहफ़्फ़ुज़ ख़तन नबुव्वत ट्रस्ट आंध्र प्रदेश के अरकान मौलाना शाह जमाल उर रहमन मिफताही, मौलाना मुफ़्ती अबदालमग़नी मज़ाहरी, मौलाना ख़ालेद सैफ-उल्लाह रहमानी, मौलाना मुहम्मद अब्दुल खवि, मौलाना मुफ़्ती ग़ियास उद्दीन रहमानी क़ासिमी, म

मजलिस तहफ़्फ़ुज़ ख़तन नबुव्वत ट्रस्ट आंध्र प्रदेश के अरकान मौलाना शाह जमाल उर रहमन मिफताही, मौलाना मुफ़्ती अबदालमग़नी मज़ाहरी, मौलाना ख़ालेद सैफ-उल्लाह रहमानी, मौलाना मुहम्मद अब्दुल खवि, मौलाना मुफ़्ती ग़ियास उद्दीन रहमानी क़ासिमी, मौलाना ख़्वाजा नज़ीर उद्दीन सबीली, मौलाना मुसल्लेह उद्दीन क़ासिमी, मौलाना मुहम्मद अमजद अली क़ासिमी,और मौलाना मुहम्मद अरशद अली क़ासिमी ने अपने ब्यान में कहा के मुस्लमान ईद-उल-अज़हा के मुबारक मौखे पर बड़े जोश ख़ुरोश और ख़ुलूस के साथ सय्यदना हज़रत इबराहीम ख़लील-उल्लाह की यादगार क़ुर्बानी का फ़रीज़ा अंजाम देते हैं और क़ुर्बानी के जायज़ और सही होने के बारे में उल्माए दीन से सवालात भी करते हैं।

इस पस मंज़र में हम बिरादरान इस्लाम के लिए उस की भी आगही ज़रूरी समझते हैं के मुनकरीन ख़तन नबुव्वत और ख़ारिज इस्लाम फ़िर्क़ा के पैरोकार क़ादियानीयों का ज़बह क्या हुव‌ जानवर मुस्लमानों केलिए हलाल नहीं है।

अगरचे वो बज़ाहिर इस्लामी तरीख पर ही ज़बह क्यों ना किया गया हो। इस लिए के असल एहमीयत अक़ीदे की है। उल्मा किराम ने इस की भी वज़ाहत की के इजतिमाई और मुशतर्का क़ुर्बानी के नज़म में अगर कोई एक हिस्सादार भी का दयानी हो तो इस जानवर में शरीक दुसरे हिस्सा दारों में से किसी की भी क़ुर्बानी दरुस्त नहीं होगी। तमाम बिरादरान इस्लाम से अपील है कि वो इस मसले में बहुत मुहतात और बाख़बर रहीं।

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