Saturday , January 20 2018

क़ानून की बालादस्ती , गरबा-ए-को क़ानूनी इमदाद और मुसावात

हैदराबाद।१६मार्च (सियासत न्यूज़) शहज़ादा वाला शान नवाब मुफ़ख़्ख़म जाह बहादुर ने आज आसिफ़ जाहि दौर-ए-हकूमत में अदल-ओ-इंसाफ़ का नज़म-ओ-नसक़ के मौज़ू पर प्रोफ़ैसर अहमद उल्लाह ख़ान की अंग्रेज़ी तसनीफ़ की रस्म इजराई अंजाम दी। जनाब मु

हैदराबाद।१६मार्च (सियासत न्यूज़) शहज़ादा वाला शान नवाब मुफ़ख़्ख़म जाह बहादुर ने आज आसिफ़ जाहि दौर-ए-हकूमत में अदल-ओ-इंसाफ़ का नज़म-ओ-नसक़ के मौज़ू पर प्रोफ़ैसर अहमद उल्लाह ख़ान की अंग्रेज़ी तसनीफ़ की रस्म इजराई अंजाम दी। जनाब मुहम्मद अली रिफ़अत सैक्रेटरी महिकमा अक़ल्लीयती उमूर ने एज़ाज़ी मेहमान की हैसियत से शिरकत की। जनाब ज़फ़र जावेद वाइस चेयरमैन सुलतान उल-उलूम एजूकेशन सोसाइटी ने सदारत की। जबकि जनाब ख़्वाजा रुकन उद्दीन अहमद सैक्रेटरी और प्रोफ़ैसर अख़तर परनसपाल सुलतान उल-उलूम ला कॉलिज शहि नशीन पर मौजूद थी।

जनाब मुहम्मद अलीरिफ़अत ने ख़ानदान आसिफ़ जाहि की ख़िदमात को पुरासर अलफ़ाज़ में ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया और कहा कि हैदराबाद की पुरशिकोह इमारतें ख़ाह वो हाइकोर्ट की हो या उस्मानिया हॉस्पिटल की या शिफ़ाख़ाना निज़ामीया की। ये आसिफ़ जाहि हुकमरानों कीअज़मत की शहादत देती हैं। हर शोबा-ए-हियात में आसिफ़ जाहि हुकमरानों ने अपनी ख़िदमात के अनमिट नुक़ूश छोड़े हैं। हैदराबाद के हिंदूस्तान में इंज़िमाम के बाद आख़िरीनिज़ाम को राज प्रमुख का ओहदा दिया गया जो गवर्नर का ओहदा ही। उन्हों ने कहा कि शहज़ादा मुफ़ख़्ख़म जाह को गवर्नर होना चाहीए था।जनाब ज़फ़र जावेद ने शहज़ादा वाला शान को ख़िराज-ए-तहिसीन पेश करते हुए कहा कि वो अवाम के दिल और दिमाग़ पर हुक्मरानी कर रहे हैं।

तालीम और सेहत के शोबों में इन की ख़िदमात मुस्लिमा हैं। प्रोफ़ैसर अहमद उल्लाह ख़ान ने बताया कि इस किताब की तसनीफ़ का मक़सद ये बताना है कि अमरीका और यूरोप आज जिन ख़िदमात या इस्लाहात को अपना कारनामा साबित करना चाहते हैं वो डेढ़ सौ साल पहले आसिफ़ जाहि ख़ानदान राइज करचुके थी। जिन में ग़रीबअफ़राद को क़ानूनी इमदाद की फ़राहमी ही। अदलिया को इंतिज़ामीया से अलैहदा करदिया गया था जबकि बाक़ायदा ज्यूरी (मुशावरती कौंसल) का निज़ाम राइज था। आज़ाद-ओ-ग़ैर जांबदार अफ़राद 13रुकनी कमेटी का इंतिख़ाब होता और क़ुरआ अंदाज़ी के ज़रीया 9अरकान ज्यूरी में शामिल किया जाता।

आला हज़रत ज्यूरी के फ़ैसलों का एहतिराम करती। सज़ाए मौत, उम्रकैद और दस हज़ार रुपय से ज़ाइद जुर्माना जैसे मुआमलात को रास्त आला हज़रत नवाब मर उसमान अली ख़ान से रुजू किया जाता। बिलकुल इसी तरह जैसा कि आज बर्तानिया में मलिका से और हिंदूस्तान में सदर जमहूरीया से रुजू किया जाता हैं।

आला हज़रत 90फ़ीसद मुक़द्दमात जोडीशील कमेटी की राय से यकसूई फ़रमाती। आख़िरीनिज़ाम के दौर में मुमताज़ और ज़ी हैसियत शख़्सियात की अदालत में हाज़िरी से इस्तिस्ना की सिफ़ारिश की गई थी नवाब मीर उसमान अली ख़ान ने ये कहते हुए नामंज़ूर कर दिया कि ये इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वरज़ी हैं क्यों कि हर शहरी अपनी जगह मुमताज़ ही। इस तरह आला हज़रत ने क़ानून की बरतरी को बरक़रार रखा। प्रिंस मुफ़ख़्ख़म जाह बहादुर ने प्रोफ़ैसर अहमद उल्लाह ख़ान को इस तसनीफ़ के लिए मुबारकबाद पेश की।

TOPPOPULARRECENT