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क़ुरआन के ख़िलाफ़ अदालती हुक्म के बाद रूस में नई क़ानूनसाज़ी

रूस में तीनों बड़े इल्हामी मज़ाहिब समेत मुख़्तलिफ़ अक़ाइद के सहीफ़ों पर आइन्दा कोई पाबंदी नहीं लगाई जा सकेगी। इस का पस मंज़र ये है कि एक रूसी अदालत ने हाल ही में मुतअद्दिद क़ुरआनी आयात को इंतिहा पसंदाना क़रार दे दिया था।

रूसी दारुल हुकूमत मास्को से जुमेरात बारह नवंबर को मिलने वाली न्यूज़ एजैंसी के एन ए की रिपोर्टों के मुताबिक़ मुल्की पार्लीमान के ऐवान-ए-ज़ेरीं या दूओमा ने बुध को रात गए एक ऐसे क़ानूनी मुसव्वदे पर तीसरी मर्तबा बहस के बाद उस की हतमी मंज़ूरी दे दी।

जिसके तहत रूस में आइन्दा इस्लाम, मसीहीयत और यहूदियत के सहीफ़ों के साथ साथ बुध मत की तहरीरी तालीमात पर भी उनमें दर्ज अहकामात को इंतिहा पसंदाना क़रार देकर कोई पाबंदी नहीं लगाई जा सकेगी।

रूसी दूओमा में ये मसौदा-ए-क़ानून सदर व्लादीमीर पुतीन की तरफ़ से पेश किया गया था, जिसकी मंज़ूरी के बाद अब मुसलमानों की मुक़द्दस किताब क़ुरआन, मसीहीयों की इंजील और यहूदीयों की तौरेत के साथ साथ बुध मत की तहरीरी तालीमात में से लिए गए इक़तिबासात को भी ना तो कोई रूसी अदालत ममनू क़रार दे सकेगी और ना ही उनकी नशर और इशाअत पर कोई पाबंदी लगाई जा सकेगी।

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