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क़ौमों की बक़ा ज़बान में मुज़म्मिर, उर्दू बोलने से ज़्यादा लिखने पढ़ने की ज़रूरत

रोज़नामा सियासत और सालार जंग म्यूज़ीयम के इश्तिराक से जारी नुमाइश ख़त्ताती का आज पाँच हज़ार से ज़ाइद अफ़राद ने मुशाहिदा किया। शेख़ मुहम्मद फ़ारूक़ी लिखते हुए कि ज़िंदा है उर्दू जिन के दम से ये सब हैं आज उर्दू बोलने से ज़्यादा लि

रोज़नामा सियासत और सालार जंग म्यूज़ीयम के इश्तिराक से जारी नुमाइश ख़त्ताती का आज पाँच हज़ार से ज़ाइद अफ़राद ने मुशाहिदा किया। शेख़ मुहम्मद फ़ारूक़ी लिखते हुए कि ज़िंदा है उर्दू जिन के दम से ये सब हैं आज उर्दू बोलने से ज़्यादा लिखने पढ़ने की ज़रूरत है। अब हर घर में उर्दू लिखने और पढ़ने को रिवाज देना चाहीए। उन्हों ने लिखा कि क़ौमों की बक़ा ज़बान में मुज़म्मिर है।

अगर ज़बान ज़िंदा हो तो क़ौम ज़िंदा है। अब्दुल सत्तार और अमीर इस्लाम के फ़न्नी नमूने बिलख़ुसूस चावल पर ख़त्ताती से बहुत मुतास्सिर हुए। सेब और दीगर फ़नपारे को बार बार देखने को जी चाहता है। मुहतरमा नुज़हत लिखती हैं कि नुमाइश को देख कर उन का दिल बाग़ बाग़ हो गया।
अलफ़ाज़ में आती है कहाँ कैफ़ीयत दिल
महसूस जो होता है जताया नहीं जाता
करीमुन्निसा लिखतीं हैं कि यहां ख़त्तात हज़रात से मुलाक़ात हुई और उन के अमली मुज़ाहरा को देख कर दिली मुसर्रत और नया हौसला मिला। जनाब हामिद हाश्मी एडवोकेट लिखते हैं कि फ़न ख़त्ताती को ज़िंदा और बाक़ी रखने की कोशिश करने वाले हज़रात क़ाबिले मुबारकबाद हैं।

इस नुमाइश को अज़ला और दीगर शहरों तक तौसीअ दी जाए। बिलख़ुसूस जनाब ज़ाहिद अली ख़ान एडीटर सियासत के इस इक़दाम की उन्हों ने सताइश की। हाफ़िज़ नसीर उद्दीन हस्सामी वरंगल लिखते हैं कि ये पुररौनक़ ख़त्ताती की नुमाइश क़ौम के लिए एक नई फ़िक्र मुहय्या करती है। उर्दू से दूरी के इस दौर में ये कशिश पैदा कर रही है। इस तरह की नुमाइश का एहतेमाम उर्दू को उस का खोया हुआ हक़ दिला सकता है।

वो काबिले तारीफ़ है। रहमान सालेह लिखते हैं कि ख़त्तात ना सिर्फ़ उर्दू, फ़ारसी और अरबी के रस्म उलख़त के हुस्न को बाक़ी रखे हुए हैं बल्कि कमाहक़ा उसे अदा कर रहे हैं। ये नुमाइश हमारे उर्दू के शहर हैदराबाद का नाम सारी दुनिया में रौशन कर रही है। कल्बी और रुहानी मुसर्रत हासिल हो रही है।

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