Friday , December 15 2017

कांग्रेस, एस पी और बी एस पी की मिली भगत : गडकरी

इलहाबाद, ०९ फरवरी (पी टी आई) बदउनवानीयों और वोट बैंक सियासत करने केलिए दरअसल कांग्रेस , बी एस पी और एस पी ज़िम्मेदार हैं और उन तीनों पार्टियों का मुआमला एसा है जिसे हम मिसाल के तौर पर एक ही थाली के चिट्टे बट्टे कह कर इस्तेमाल करते हैं

इलहाबाद, ०९ फरवरी (पी टी आई) बदउनवानीयों और वोट बैंक सियासत करने केलिए दरअसल कांग्रेस , बी एस पी और एस पी ज़िम्मेदार हैं और उन तीनों पार्टियों का मुआमला एसा है जिसे हम मिसाल के तौर पर एक ही थाली के चिट्टे बट्टे कह कर इस्तेमाल करते हैं।

इन तीनों ही जमातों को बदउनवानीयों और वोट बैंक सियासत करने में महारत हासिल है जबकि बी जे पी ने कभी भी उसूलों से समझौता नहीं किया । उत्तरप्रदेश इंतेख़ाबात के लिए बी जे पी का आज भी वही मौक़िफ़ है कि वाज़िह अक्सरियत ना मिलने पर पार्टी अपोज़ीशन में बैठना पसंद करेगी ।

पार्टी के क़ौमी सदर नीतिन गडकरी ने इंतिहाई तल्ख़ लहजा अपनाते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने इंतेख़ाबी मंशूर में मज़हबी अक़ल्लीयतों केलिए तहकीकात का वायदा किया है लेकिन हम ये जानना चाहते हैं कि अगर ये पार्टियां तहफ़्फुज़ात पर किस तरह अमल आवरी करेंगी की उनका सुप्रीम कोर्ट ने वाज़िह कर दिया है कि तहफ़्फुज़ात 50 फीसद से तजावुज़ नहीं करना चाहीए ।

इन पार्टियों को ये भी वाज़िह करना चाहीए कि आया वो एस सी और ओ बी सी केलिए मुख़तस कोटा में डंडी मारना चाहती हैं। दूसरी तरफ़ बी एस पी जो अपने आप को दलितों का मसीहा बनाकर पेश करती है लेकिन इस ने भी मानी ख़ेज़ ख़ामोशी इख़तेयार कर रखी है । नीतिन गडकरी अख़बारी नुमाइंदों से बात कर रहे थे और अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्हों ने कहा कि सूरत-ए-हाल देख कर तो यही लगता है कि इन तमाम पार्टियों की आपस में मिली भगत है की उनका इन पार्टियों के माबेन बेहतरीन अंडर स्टैंडिंग का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ये सिर्फ़ वोट बैंक सियासत तक ही महिदूद नहीं है बल्कि जब जब उन पर बदउनवानीयों का इल्ज़ाम आइद किया जाता है तो ये एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ जाती हैं ।

महंगाई के मौज़ू पर जब यू पी ए हुकूमत को पार्लीमेंट में एतिमाद का वोट हासिल करने जैसी आज़माईश से गुज़रना पड़ा था तो उस वक़्त एस पी और बी एस पी ने यू पी ए हुकूमत की ताईद की थी ।

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