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कांग्रेस का इक़तिदार , रियासत पर बदनुमा दाग़

निर्मल 22 मई: कांग्रेस ने अपने दौर-ए-इक्तदार में बे क़ाईदगियों और रिश्वत सतानी के ज़रीये रियासत की सियासत के मुक़द्दर पर एक बदनुमा दाग़ लगा दिया।

निर्मल 22 मई: कांग्रेस ने अपने दौर-ए-इक्तदार में बे क़ाईदगियों और रिश्वत सतानी के ज़रीये रियासत की सियासत के मुक़द्दर पर एक बदनुमा दाग़ लगा दिया।

पसमांदा ज़िला आदिलाबाद की तरक़्क़ी का जायज़ा लिया जाये तो ज़िला के हर इलाके में सिवाए संग-ए-बुनियाद के कुतबों के अलावा कुछ नहीं दिखाई देगा बल्के कई संग-ए-बुनियाद के कुतबों के अतराफ़ अब घांस उगने लगी है।

इन ख़्यालात का इज़हार मुक़ामी दफ़्तर सियासत में नुमाइंदा सियासत जलील अज़हर से बातचीत करते हुए सुमन राथोड़ रुक्ने एसम्बली ख़ानापुर ने किया।

करप्शन के ख़िलाफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ तेलुगूदेशम जद्द-ओ-जहद कररही है, जबके अवाम जद्द-ओ-जहद करनेवाली जमात के साथ साथ हुकमरान जमात की करप्शन का मुशाहिदा कररहे हैं।

आज वज़ीर-ए-आला आंध्र प्रदेश दागदार वुज़रा के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बजाये उन के तहफ़्फ़ुज़ में परेशान हैं। एसी हुकूमत जो सिर्फ़ अपने आप को मुस्तहकम करने और दागदार वुज़रा के तहफ़्फ़ुज़ के लिए फ़िक्रमंद हो , भला वो अवाम की तरक़्क़ी और रियासत की तरक़्क़ी के लिए किया करसकती है।

कांग्रेस को अब रियासत के अवाम से कोई दिलचस्पी नहीं रही बल्के अपनी कुर्सी और धांदलियों के ज़रीये की गई लूट की पर्दापोशी के लिए हिक्मत-ए-अमली की तैयारी के साथ ही अपने आक़ावें को ख़ुश करने की पालिसी पर कांग्रेस चलरही है, ताहम रियासत के अवाम करप्शन का टी वी पर मुशाहिदा कररहे हैं।

अगर सी बी आई ने पूरी संजीदगी के साथ गहराई में जाकर कांग्रेस को कीकरप्शन से बेनकाब कर दिया तो में समझती हूँ कि काबीना में कोई भी वज़ीर बाक़ी नहीं रहेगा।

जबके सबीता इंदिरा रेड्डी वज़ीर-ए-दाख़िला और धर्मना प्रसाद को बहुत पहले अपने ओहदे से स्तीफ़ा दे देना चाहीए था ताहम दिल्ली के दौरे मुकम्मल होने के बाद चीफ़ मिनिस्टर की हिदायत पर सिर्फ़ दो वुज़रा ने स्तीफ़ा दिया है, वैसे रियासत के अवाम बहुत जल्द कांग्रेस को घर का रास्ता बतादेंगे।

इक़तिदार की गर्मी आरिज़ी होती है। रियासत का कोई भी तबक़ा हुकूमत की पालिसीयों से ख़ुश नहीं है। ग़रीब अवाम की ज़िंदगी समाज में एक सवाल बन कर रह गई।

आख़िर इन का पुर्साने हाल कौन है। महंगाई ने दो वक़्त की रोटी से महरूम कर दिया और हुकूमत रियासत के हर इलाके में करोड़ों रूपियों के एलान करते हुए सिर्फ़ तक़ारीब में मसरूफ़ है।

वैसे तेलुगूदेशम ने कभी इक़तिदार की परवाह नहीं की। हमेशा अवामी मसाइल और अवाम के दरमयान रहते हुए नाइंसाफ़ीयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती आई है और उठाती रहेगी क्यूंकि तेलुगूदेशम ने अपने 9 साला दौर-ए-इक्तदार में एक मुस्तहकम हुकूमत अवाम को फ़राहम की थी जिस को आज शहरों के अवाम ही नहीं बल्के देही इलाक़ों के अवाम भी याद कररहे हैं और रियासत आंध्र प्रदेश में चन्द्रबाबू नायडू की इक़तिदार पर वापसी के लिए बेचैन हैं।

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