कांग्रेस ने मुस्लिमों से बनाई दुरी? राजस्थान में इस बार कम उम्मीदवारों को देगी टिकट

कांग्रेस ने मुस्लिमों से बनाई दुरी? राजस्थान में इस बार कम उम्मीदवारों को देगी टिकट

इस साल होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां रणनीति बनाने में जुटी हैं. दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता अपनी-अपनी पार्टी का प्रचार कर रहे हैं. इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक 2013 की तुलना में कांग्रेस इस बार कम मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी. इसकी वजह भी है. पिछली बार कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन कोई भी उम्मीदवार नहीं जीत सका. पार्टी का कहना है कि इस बार टिकट के बंटवारे में सिर्फ और सिर्फ इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट मिले.

कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि इस बार हाईकमान से निर्देश मिला है कि सिर्फ उसी उम्मीदवार को टिकट दें जो जीते. इस बार हम बिना वजह किसी तरह का संतुलन बनाने की हालत में नहीं है. अंत में यही मायने रखता है कि आपने कितनी सीटें जीतीं.

राजनीतिक पंडित अनिल कुमार सिंह का कहना है कि कांग्रेस का यह कदम सॉफ्ट हिन्दुत्व की दिशा में उठाया गया कदम है. कांग्रेस अपनी रैलियों में इस बार अल्पसंख्यकों का कोई मुद्दा भी नहीं उठा रही है. उनका कहना है कि शिव भक्त राहुल बार-बार मंदिर जा रहे हैं. अभी कैलाश मानसरोवर से लौटे हैं ये सब सॉफ्ट हिन्दुत्व का ही परिणाम है. कांग्रेस बीजेपी की दवा से ही उसे खत्म करना चाहती है.

वहीं कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष निजाम कुरैशी का कहना है कि मुस्लिम समुदाय इस बार कांग्रेस से 15 से 20 टिकट चाहता है. उनका कहना है कि मुस्लिम और भागीदारी चाहतेे हैं. अगले 15 दिनों में हम स्टेट लेवल अल्पसंख्यक कॉन्क्लेव करने जा रहे हैं. इसमें हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि कहां-कहां हम जीत की स्थिति में हैं.

कुरैशी का कहना है कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 9.1 प्रतिशत है. जैसलमेर (25.1%) अलवर (14.9%) भरतपुर (14.5%) और नागपुर में 13.7 % मुस्लिम आबादी ज्यादा है इन जिलों में कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है. इसके अलावा सीकर, चूरू और झुंझुनू में भी मुस्लिम कुछ सीटों पर निर्णायक हैं. 2008 में कांग्रेस ने मुस्लिमों को 14 टिकट दिए थे. इनमें से 10 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.

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