Friday , May 25 2018

कांग्रेस हुकूमत में हौसला होता तो मोदी जेल में होता

एक ऐसे वक़्त जब कि इंतिख़ाबी मुहिम के इख़तेताम के लिए बड़ी मुश्किल से एक हफ़्ता बाक़ी रह गया है। तमाम सियासी जमाअतें मुसलमानों के वोट हासिल करने पर तवज्जा मर्कूज़ किए हुए है। कांग्रेस, टी आर एस, वाई एस आर कांग्रेस, तेलुगु देशम हर कोई मु

एक ऐसे वक़्त जब कि इंतिख़ाबी मुहिम के इख़तेताम के लिए बड़ी मुश्किल से एक हफ़्ता बाक़ी रह गया है। तमाम सियासी जमाअतें मुसलमानों के वोट हासिल करने पर तवज्जा मर्कूज़ किए हुए है। कांग्रेस, टी आर एस, वाई एस आर कांग्रेस, तेलुगु देशम हर कोई मुस्लिम वोटरों पर नज़रें जमाए हुए हैं। उन्हें अच्छी तरह अंदाज़ा है कि तेलंगाना में अगर अक़लीयतों और आंध्र और राइलसीमा से आकर बस जाने वालों के वोटों को मिलाया जाए तो वो इन्क़िलाब बरपा कर सकते हैं।

इन हालात में मुसलमान लोक सभा की 17 में से कम अज़ कम 12 और 119 असेंबली हल्क़ों में कम अज़ कम 80 हल्क़ों में बादशाहगर का किरदार अदा कर सकते हैं। लेकिन फ़िर्क़ापरस्तों की शिकस्त को यक़ीनी बनाने के लिए मुसलमानों को इंतिहाई दानिशमंदी और होशियारी के साथ अपने वोटों का इस्तेमाल करना चाहीए। दिलचस्पी की बात ये है कि फ़िलवक़्त हर सियासी जमात कासा-ए-गदाई लिए मुसलमानों के पास पहुंच रही है।

ख़ुद बी जे पी को भी अच्छी तरह अंदाज़ा है कि मर्कज़ में मोदी और रियासत में बी जे पी और इस के इत्तिहाद को इक़्तेदार से रोकने में मुसलमान ही अहम रोल अदा कर सकते हैं। इस सिलसिले में राक़िमुल हरूफ़ ने मुशीराबाद के एक मुमताज़ मुस्लिम ताजिर से बात की उन के ख़्याल में मौजूदा इंतिख़ाबात में अगर मुसलमान दानिशमंदी के साथ अपने हक़ रायदेही का इस्तेमाल करते हैं तो बी जे पी को पार्लीमानी और रियासती इंतिख़ाबात दोनों में नुक़्सान पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर काग्रेंस में हौसला होता तो इस ववक्त मोदी जेल में होता। इस के लिए मुसलमानों का बड़ी बुराई और छोटी बुराई में इम्तियाज़ करना ज़रूरी है। क्यों कि कांग्रेस हो या टी आर एस कोई भी सियासी जमात मुसलमानों की हमदर्द नहीं है बल्कि उन्हें एक सियासी खिलौने की तरह इस्तेमाल करती हैं। इन हालात में मुसलमानों को मौक़ा और महल की मुनासबत से फैसला करते हुए सेक्यूलर जमातों या उम्मीदवारों के हक़ में अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहीए।

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