Saturday , December 16 2017

काबतुल्लाह की तस्वीर की बेहुर्मती(तौहीन) करने वाला शरपसंद ज़मानत पर रेहा

अब्बू ऐमल अमन-ओ-अमान को बिगाड़ना अवाम के सुकून को तबाह-ओ-बर्बाद करदेना और दो फ़िरक़ों के दरमयान नफ़रत फैला कर माहौल को फ़िर्का परस्ती के ज़हर से आलूदा (गनदा)करना एसे संगीन जराइम हैं जिस के लिए मुरतकेबीन(मुलजिम) को सख़्त सज़ाएं दी ज

अब्बू ऐमल अमन-ओ-अमान को बिगाड़ना अवाम के सुकून को तबाह-ओ-बर्बाद करदेना और दो फ़िरक़ों के दरमयान नफ़रत फैला कर माहौल को फ़िर्का परस्ती के ज़हर से आलूदा (गनदा)करना एसे संगीन जराइम हैं जिस के लिए मुरतकेबीन(मुलजिम) को सख़्त सज़ाएं दी जानी चाहीए। वैसे भी कोई भी मज़हब नफ़रत की तालीम नहीं देता जबकि आम शहरी अमन पसंद होता है लेकिन मुट्ठी भर शरपसंद अपनी जुनूनी तंज़ीमों के आला कार बनते हुए मज़हबी जज़बात को ठेस पहुंचा कर अवामी जज़बात के इस्तिहसाल से अपने अज़ाइम (मकसद)की तकमील करलेते।ताहम अक्सर-ओ-बेशतर मौक़ों पर वो बेनकाब होजाते हैं।

हालिया अर्सा में सिंगा रेड्डी और शहर के मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर शरपसंदों ने जिस अंदाज़ में लोगों के मज़हबी जज़बात का इस्तिहसाल करना चाहा। इस से उन के नापाक अज़ाइम (मकसद)का पता चलता है। अफ़सोस तो तब होता है जब गुनहगार ख़ाती पकड़े जाते हैं और उन्हें ज़ाबता की तकमील के लिए सहाफ़त के रूबरू पेश करदिया जाता है और चंद घंटों के बाद उन की रिहाई भी अमल में आती है। क़ारईन आप को याद होगा कि काबतुल्लाह की तस्वीर की बेहुर्मती(तौहीन) करते हुए उसे गुस्ताखाना अंदाज़ में फेसबुक पर पेश किया गया था, जिस के बाद संगा रेड्डी में फ़साद फूट पड़ा और हैदराबाद में भी एक शरपसंद नौजवान ने एसी ही गुस्ताख़ी से मुस्लमानों के जज़बात मजरूह किए थे।

इस सिलसिला में पुलिस ने श्योराम पली पुलिस एकेडेमी के रूबरू और बालाजी धाबे से मुत्तसिल आर ऐस ऐस कोम्प्लेक्स में वाक़ै इंटरनैट कैफे ठाकुर ऑनलाइन के मालिक गोपाल सिंह के भतीजे विशाल सिंह ठाकुर और इस के साथी गंगाराम रणजीत सिंह डी टी पी ऑप्रेटर को गिरफ़्तार करलिया था, लेकिन हैरत-ओ-ताज्जुब की बात है के इन दोनों शरपसंदों को गिरफ़्तारी के अंदरून तीन यौम रिहा करदिया गया। वाज़ेह रहे कि गोपाल सिंह ना सिर्फ इंटरनैट कैफे का मालिक है इंटरनैट कनैक्शन भी दिया करता है। वो तक़रीबन तीन साल से इस गली में इंटरनैट कैफे चला रहा है।मुक़ामी अफ़राद ने दफ़्तर सियासत से रुजू होकर बताया कि शरपसंदों को इस तरह बा आसानी ज़मानत का मिल जाना पुलिस के रोल पर कई सवालात पैदा करदेते हैं।

बाअज़ अफ़राद ने शरपसंदों के इश्तिआल दिलाने के बावजूद मुस्लमानों के सब्र-ओ-तहम्मूल का हवाला देते हुए कहा कि विशाल सिंह ठाकुर , रणजीत सिंह मादन्ना पेट के नागराज किरण कुमार रमेश दयानंद सिंह सैनू और निरंजन की जगह अक़ल्लीयती नौजवान होते तो क़ानून के रखवाले इन का जीना हराम कर देते । यहां तक कि तफ़तीश के नाम पर उन के साथ ज़ालिमाना सुलूक रवा किया जाता और जब वो रिहा होते तो चलने फिरने के भी क़ाबिल नहीं रहते। 70 साला एक शख़्स ने बताया कि मज़हबी जज़बात को मजरूह करके अपने मफ़ादात की तकमील करने वालों को सख़्त सज़ाएं दी जानी चाहीए लेकिन संगीन जुर्म के मुर्तक़िब होने के बावजूद कई शरपसंदों को जल्द रहा करदिया गया।

उन्हों ने मादन्ना पेट मंदिर में बड़े जानवर के पैर और सबज़ रंग फेंके जाने और फिर इस के बहाने अक़ल्लीयती फ़िर्क़ा की इमलाक को तबाह करने बेकसूरों पर हमलों और मासूम नौजवानों की गिरफ़्तारीयों का हवाला दिया और कहा कि अक़ल्लीयती नौजवानों को गिरफ़्तार करते ही उन की कम़्यूनल रूडी शीट खोल दी जाती है और उन पर कई फ़र्ज़ी (झूटे) इल्ज़ामात आइद करते हुए मुख़्बिर और पुलिस में शामिल चंद अनासिर अपनी जेबें गर्म कर लेते हैं। हमें इस ज़ईफ़ शख़्स के ख़्यालात जान कर हैरत नहीं हुई क्योंकि उन्हों ने जो कुछ कहा है अक्सर ऐसा ही देखने में आया। यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी होगा कि यक्म मार्च को छत्ता बाज़ार के यूसुफ़ मार्किट से कारवाँ के साकिन 20 साला हरी को गिरफ़्तार किया गया था इस ने अपने मोबाईल फ़ोन में एसे मनाज़िर छुपा रखे थे, जिस में मुक़ामात मुक़द्दसा की बेहुर्मती(तौहीन) की गई थी।

इसी तरह 18 अप्रैल को बहादुर पूरा की मस्जिद इबराहीम ख़लील-उल-ल्लाह में कुत्ता काट कर डाल दिया गया। इस वाक़िया में भी अक्सरीयती फ़िर्क़ा के नौजवानों को गिरफ़्तार किया गया । इस से दो दिन क़ब्ल किशन बाग़ की एक मंदिर में बड़े जानवर का गोश्त डाल दिया गया। इस वाक़िया में पुलिस ने अक्सरीयती फ़िर्क़ा के नौजवानों की गिरफ़्तारी अमल में लाई। अवाम का ये कहना कि शरपसंदों के साथ सख़्ती से निमटा जाना चाहीए बिलकुल हक़ बजानिब है। हैदराबाद की गंगा जमनी तहज़ीब के दिलदादा एक हिन्दू बुज़ुर्ग शख़्स ने जिन का शुमार शहर के दानिश्वरों में होता है, फ़िर्कावाराना फ़सादात भड़काने की कोशिश करने वाले ठाकुर विशाल और इस के साथी की गिरफ़्तारी के अंदरून 3 यौम(दिन) रिहाई पर अफ़सोस का इज़हार किया

और कहा कि अपनी गंदी हरकात के ज़रीया शहर बल्कि रियासत में अमन-ओ-अमान का मसला पैदा करने वाले इन शरपसंदों को किसी किस्म की ढील नहीं देनी चाहीए। इन के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई हो जिस से दूसरों को इबरत (सबक)हासिल हो । मुल्क-ओ-शहर के लिए फ़िक्रमंद उस शख़्स ने ये भी कहा कि अमन-ओ-अमान की बहाली में पुलिस अहम रोल अदा करती है। अगर पुलिस जांनिबदाराना रविष तर्क करदे और ग़ैर जांनिबदाराना अंदाज़ में काम करे तो फिर शरपसंदों के लिए किसी किस्म का मसला पैदा करना नामुमकिन होजाएगा।

पत्थर गट्टी के एक ताजिर ने बताया कि अवाम किसी भी किस्म का मसला नहीं चाहते बल्कि वो जीयो और जीने दो में यक़ीन रखते हैं । इस ताजिर ने बताया कि शरपसंदों के बाइस जब भी हालात ख़राब होते हैं, इस से आम आदमी के साथ ताजरीन काफ़ी मुतास्सिर होजाते हैं। उन्हों ने चंद अर्सा क़ब्ल पेश आए वाक़ियातका ज़िक्र करते हुए बताया कि इस दौरान ताजरीन को हर रोज़ 200 करोड़ रुपये का नुक़्सान बर्दाश्त करना पड़ा। इस तरह अमन में फ़ायदा ही फ़ायदा और लड़ाई झगड़ों, दंगे फ़सादात में सिर्फ नुक़्सान ही नुक़्सान है। काश ये बात इंसानियत के दुश्मन शरपसंद और उन के आक़ा के साथ साथ क़ानून के रखवाले समझ सकते [email protected]

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