Tuesday , December 12 2017

काबू में कोसी, तबाही का खतरा टला

नेपाल में भारी अकसरियत के बाद बनी मसनुई झील से पानी के कंट्रोल बहाव की वजह से कोसी इलाक़े में सैलाब का खतरा तकरीबन टल गया है। रियासती हुकूमत ने मंगल को सैलाब की ज़्यादा खदशा वाले तीन जिलों सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में भी लोगों को निकाल

नेपाल में भारी अकसरियत के बाद बनी मसनुई झील से पानी के कंट्रोल बहाव की वजह से कोसी इलाक़े में सैलाब का खतरा तकरीबन टल गया है। रियासती हुकूमत ने मंगल को सैलाब की ज़्यादा खदशा वाले तीन जिलों सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में भी लोगों को निकालने की कार्रवाई रोक दी।

इन जिलों के कैंपों में रह रहे लोगों को अपने घरों को लौटने को कहा गया है। तबाही इंतेजामिया के प्रिन्सिपल सेक्रेटरी व्यासजी ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल मसनुई झील में दस मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा है, जिसकी गहराई तकरीबन 40 मीटर है।

वीरपुर बराज पर 1.15 लाख क्यूसेक पानी का बहाव हो रहा है। हालात पूरी तरह कंट्रोल में है। किसी भी हंगामी सुरते हाल से निपटने के लिए आर्मी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट रखा गया है।

साथ ही कैंपों में पूरी तैयारी रखी जाएगी, ताकि किसी भी हंगामी सुरते हाल से निपटा जा सके। प्रिन्सिपल सेक्रेटरी ने बताया कि कैंपों से लौटने वाले लोगों को बताया जा रहा है कि फिलहाल खतरा कम हुआ है, खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि दरभंगा, मधुबनी, खगड़िया और भागलपुर के अलावा पूर्णिया और अररिया के कैंपों को पीर को ही बंद कर दिया गया था।

हालांकि सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में चल रहे 93 कैंप अभी चलते रहेंगे। सुपौल और सहरसा जिलों से 1,14,073 लोगों को निकाला गया है। व्यासजी ने बताया कि सैलाब के मौसम को देखते हुए हुकूमत ने तैयारियों में कोई ढील नहीं देने का फैसला लिया है।

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