Wednesday , August 15 2018

कामयाब लैंडिंग की ज़िम्मेदारी

सेंट‌ मार्टिन को वो लम्हा अच्छी तरह याद है जब उन्हों ने तै किया था कि वो स्पेस इनजीनीय‌र बनेंगे।976 ए- में मौसिम-ए-सर्मा की एक सर्द रात को अपने वालदैन के फ़ाम में आसमान की तरफ़ देख रहा था और इस के साथ रेडीयो पर बीबी सी की शॉट वेव नशरियात पर मिर्रीख़ के एक मिशन से मुताल्लिक़ रिपोर्ट सुन रहा था।

मीगाल सेंट मार्टिन उस वक़्त सतरह बरस के थे और अपने वतन अर्जनटाइन में मुक़ीम थे और इस वक़्त उन्हें मालूम नहीं था कि बीस साल के बाद वो अमेरीकी ख़लाई एजैंसी नासा में मिर्रीख़ के आइन्दा मिशन के साथ मुंसलिक होंगे। नासा ने पाथफाइंडर नामी ये मिशन साल 1997 -ए-में शुरू किया था।नासा ने बिलकुल उसी वक़्त एरोनॉटिक्स और इस के माहिरीन की ख़िदमात हासिल करना शुरू कीं जब उन्हों ने मुमताज़ तालीमी इदारे मैसे चीवसटस इंस्टीटियूटऔफ़ टैक्नोलोजी से मास्टर की डिग्री हासिल की थी।

नासा के साथ काम करने के 27 साल के बाद सेंट‌ मार्टिन को अब एक बड़े चैलेंज का सामना है क्योंकि नासा की जानिब(तरफ‌) से गुज़श्ता साल नवंबर में मिर्रीख़ पर भेजी गई कीवरोसटी नामी ख़लाई रोबोट गाड़ी सत्तावन करोड़ किलोमीटर का सफ़र तै करने के बाद मिर्रीख़ पर पहुंच रही है।

नासा में मारज़ साईंस लेबोरेटरी या ऐम ऐस एल मैं नेवीगेशन ऐंड कंट्रोल के शोबा के सरबराह के तौर पर उन की ये ज़िम्मेदारी है कि वो 6 अगस्त बरोज़ पीर को कीवरोसटी को महफ़ूज़ तरीक़े से मिर्रीख़ पर उतारें।और ये कारनामा सरअंजाम देना कोई आसान काम नहीं होगा, कीवरोसटी सिर्फ़ नासा का इंतिहाई जदीद रोबोट नहीं है बल्कि इस पर नासा के दस जदीद तरीन साईंसी आलात पर मौजूद हैं।

इस के अलावा ये नासा का हुजम के लिहाज़ से अब तक का सब से बड़ा और वज़नी रोबोट है जो इस से पहले साल 2003 -ए-में मिर्रीख़ पर भेजे गए स्पिरिट ऐंड अपरच्यूनिटी के हुजम से दोगुना है।

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