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कार्टूनिस्ट त्रिवेदी केख़िलाफ़ ग़द्दारी के इल्ज़ामात से दसतबरदारी(इनकार‌)

हुकूमत महाराष्ट्रा ने अवामी दबाओ और अदालत की सरज़निश के आगे सुरंगों होते हुए आज बंबई हाइकोर्ट को मतला(सूचित/आगह‌) किया कि कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के ख़िलाफ़ क़ौमी मामलात की मुबय्यना तौहीन पर दर्ज करदा ग़द्दारी के इल्ज़ामात को वाप

हुकूमत महाराष्ट्रा ने अवामी दबाओ और अदालत की सरज़निश के आगे सुरंगों होते हुए आज बंबई हाइकोर्ट को मतला(सूचित/आगह‌) किया कि कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के ख़िलाफ़ क़ौमी मामलात की मुबय्यना तौहीन पर दर्ज करदा ग़द्दारी के इल्ज़ामात को वापिस लेने का फ़ैसला किया गया है।

ऐडवोकेट जनरल ने अदालत से कहाकि इस मुक़द्दके का बग़ौर जायज़ा लेने के बाद वाज़िह तौर पर ये महसूस किया गया कि मज़कूरा कार्टूनिस्ट के ख़िलाफ़ हिंदूस्तानी ताज़ीरी क़ानून की दफ़ा 124 (अलिफ़) के तहत मुक़द्दमा दर्ज करने की कोई गुंजाइश नहीं है। चुनांचे हुकूमत ने असीम त्रिवेदी के ख़िलाफ़ दर्ज करदा इस दफ़ा से दस्तबरदार होने का फ़ैसला किया है।

बंबई हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस मोहित शाह और जस्टिस एन ऐम मजुमदार पर मुश्तमिल डीवीझ़न बंच , मफ़ाद-ए-आम्मा की एक दरख़ास्त पर समाअत कररही थी जो मुक़ामी वकील संकार मराठे ने पार्लीमैंट और दीगर क़ौमी अलामात के का रट्नोस उतारते हुए उन की मुबय्यना तौहीन के इल्ज़ामात के तहत गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ दायर किया था। इस अदालत ने पहले अपनी समाअतों के दौरान कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की ज़मानत मंज़ूर की थी।

कार्टूनिस्ट की दिमाग़ का इस्तेमाल किए बगै़र, ग़लत और ओछे अंदाज़ में गिरफ़्तारी पर सख़्त ब्रहमी का इज़हार किया था। अदालत ने इस तास्सुर का इज़हार किया कि पुलिस कार्रवाई ने सयासी कार्टूनिस्ट के हक़ आज़ादी इज़हार-ए-ख़्याल की ख़िलाफ़वरज़ी का इल्ज़ाम भी आइद किया।

मिस्टर खमबाटा ने अदालत से कहाकि असीम त्रिवेदी के सात के मिनजुमला सिर्फ तीन कार्टून अहानत आमेज़ महसूस किए गए थे। चुनांचे उन पर क़ानून क़ौमी एहतिराम और क़ानून इन्फ़ार्मेशन टैक्नोलोजी के तहत कार्रवाई की जाय, इस तरह ये मुक़द्दमा हनूज़ बरक़रार है।

अटार्नी जनरल ने कहाकि चंद‌ शिकायात पर इबतिदाई रद्द-ए-अमल के तौर पर त्रिवेदी को गिरफ़्तार किया गया था। अगरचे ये गिरफ़्तारी ठीक नहीं थी लेकिन उन्हें पुलिस तहवील में लेना भी ज़रूरी था। बेहस की समाअत के बाद डीवीझ़न बंच ने 19 अक्टूबर को सर केवलर का मुसव्वदा अदालत में पेश करने का हुक्म दिया है।

चीफ़ मैडीकल ऑफीसर के अग़वा में उन के शामिल‌ होने के बारे में एक सवाल पर विनोद सिंह उर्फ़ पण्डित सिंह ने जवाब दिया कि वो बेक़सूर हैं। उन्हों ने कहाकि रियास्ती हुकूमत पहले ही गोंडा के चीफ़ मैडीकल ऑफीसर (सी ऐम ओ) एस पी सिंह के अग़वा की तहक़ीक़ात का हुक्म दे चुकी है।

मौसूला इत्तिलाआत के मुताबिक़ वज़ीर मौसूफ़ ने मुबय्यना तौर पर एस सी ऐम ओ का अग़वा करवाया था क्योंकि क़ौमी देही तिब्बी मिशन (एन आर ऐच ऐम) के तहत इस ज़िले के महिकमा-ए-सेहत में कंट्टर एक्ट बुनियादों पर भरतीयों केलिए उन की तरफ़ से पेश करदा डाँक्टरों की लिस्ट‌ को सी ऐम ओ ने क़बूल नहीं किया था।

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