Thursday , June 21 2018

काले धन मसला पर कांग्रेस अरकान-ए-पार्लीमैंट से तबादला-ए-ख़्याल

मर्कज़ी हुकूमत ने रीटेल शोबा में रास्त बैरूनी सरमाया कारी के फ़ैसले से बिलआख़िर दसतबरदारी इख़तियार कर ली । ये दसतबरदारी तो चंद दिन क़बल ही इख़तियार कर ली गई थी ताहम अपोज़ीशन जमातों को बाज़ाबता तौर पर कल इस फ़ैसले से वाक़िफ़ करवाया गया ।

मर्कज़ी हुकूमत ने रीटेल शोबा में रास्त बैरूनी सरमाया कारी के फ़ैसले से बिलआख़िर दसतबरदारी इख़तियार कर ली । ये दसतबरदारी तो चंद दिन क़बल ही इख़तियार कर ली गई थी ताहम अपोज़ीशन जमातों को बाज़ाबता तौर पर कल इस फ़ैसले से वाक़िफ़ करवाया गया ।

इस सिलसिला में एक कल जमाती इजलास वज़ीर फ़ीनानस मिस्टर परनब मुकर्जी की जानिब से तलब किया गया था । अपोज़ीशन जमातों को वाक़िफ़ करवाने के बाद मिस्टर मुकर्जी पर ख़ुद कांग्रेस के अरकान-ए-पार्लीमैंट को वाक़िफ़ करवाने की ज़िम्मेदारी थी ।

उन्होंने आज कांग्रेस पारलीमानी पार्टी के इजलास में कांग्रेस के अरकान को इस फ़ैसले से वाक़िफ़ करवाया और कहा कि वो इन अरकान से माज़रत के ख़ाहां हैं जिन्हों ने एफडी आई मसला पर हुकूमत के मौक़िफ़ की ताईद की थी । मिस्टर परनब मुकर्जी ने आज कांग्रेस पारलीमानी पार्टी के इजलास से ख़िताब करते हुए कांग्रेस के अरकान पर ये वाज़िह किया कि हुकूमत ने बहालत मजबूरी बल्कि महिज़ अपनी बक़ा केलिए रास्त बैरूनी सरमाया कारी मसला से दसतबरदारी इख़तियार की है क्योंकि अगर हुकूमत ये फ़ैसला वापिस नहीं लेती तो हुकूमत केलिए बोहरान पैदा होजाता और मुल्क में वस्त मुद्दती इंतिख़ाबात भी यक़ीनी हो जाते ।

मिस्टर मुकर्जी ने कहा कि हुकूमत के सामने मौजूदा हालात में उस फ़ैसले से दसतबरदारी के सिवा कोई और रास्ता नहीं रह गया था ।वो कांग्रेस के इन अरकान-ए-पार्लीमैंट से इज़हार माज़रत करते हैं जिन्हों ने हुकूमत के इस फ़ैसले की ताईद की थी और इस फ़ैसले से दसतबरदारी पर जो मायूसी का शिकार हुए हैं।

मिस्टर मुकर्जी का ये एतराफ़ एहमीयत का हामिल है कि हुकूमत ने अपनी बक़ा और वस्त मुद्दती इंतिख़ाबात से बचने केलिए ये फ़ैसला किया है । एक तरह से मिस्टर मुकर्जी का ये एतराफ़ ये भी साबित करता है कि हुकूमत ने अपोज़ीशन जमातों के एहतिजाज और मुल्क़ के किसानो नावर रीटेल शोबा के छोटे ताजिरों से मुताल्लिक़ तशवीश को कोई एहमीयत नहीं दी बल्कि महिज़ इंतिख़ाबात से बचने और हुकूमत की बक़ा के लिए ये फ़ैसला किया है ।

क़बल अज़ वक़्त इंतिख़ाबात को टालना या उन से बचना हर हुकूमत की ज़िम्मेदारी है और हर हुकूमत उस की कोशिश करती है लेकिन जिस तरह से मिस्टर परनब मुकर्जी ने इंतिख़ाबात से बचने की बात कही है वो ख़ुद हुकूमत के एतराफ़ शिकस्त को ज़ाहिर करने केलिए काफ़ी है ।

इस के इलावा इस बात का भी अंदाज़ा होता है कि मर्कज़ी हुकूमत इंतिख़ाबात का सामना करने से किस हद तक ख़ौफ़ज़दा होगई है । हुकूमत को यक़ीनी तौर पर इस बात का अंदाज़ा है कि मलिक के अवाम इस के साथ नहींहैं और हुकूमत के कई फ़ैसलों की वजह से मसाइल का सामना कर रहे अवाम शायद उस की ताईद ना करें।

मुसलसल बढ़ती हुई अश्या-ए-ज़र वरीय की क़ीमतें कभी ना ख़तम् होने वाला करप्शन और पैट्रोल की क़ीमतों में इज़ाफ़ा ऐसे अवामिल हैं जिन की वजह से हुकूमत को अवाम के दरमयान भी जाते हुए ख़ौफ़ महसूस होने लगा है । जिस वक़्त मर्कज़ी हुकूमत ने रीटेल शोबा मेंर् अस्त बैरूनी सरमाया कारी की इजाज़त देने काफ़ैसला किया था उस वक़्त ये इद्दिआ किया गया था कि काफ़ी ग़ौर-ओ-ख़ौज़ के बाद और मलिक के मुफ़ादात को ज़हन में रखते हुए ये फ़ैसला किया गया था । इस फ़ैसले के नतीजा में ना सिर्फ रीटेल मार्केट में बेहतरी आऐगी बल्कि रोज़गार के मौक़ा भी पैदा होंगे ।

और अब हुकूमत ने अपने दावे के मुताबिक़ इस फ़ैसले से दसतबरदारी इख़तियार करली जो मुल्क़ के मुफ़ादात को ज़हन में रखते हुए किया गया । इस तरह हुकूमत ने अपने मुफ़ादात और अपनी बक़ा केलिए मुल्क़ के मुफ़ादात को नज़रअंदाज करदिया है । ये तो ख़ैर हुकूमत का इद्दिआ था ।

असल मसला तो ये है कि हुकूमत ने वाल मार्ट और इस जैसे ही बड़े इदारों को ख़ुश करने केलिए ये फ़ैसला किया था और कांग्रेस पारलीमानी पार्टी में मिस्टर मुकर्जी ने वस्त मुद्दती इंतिख़ाबात का जो अंदेशा ज़ाहिर किया था वो दर असल बैरूनी कंपनीयों केलिए इशारा था कि इन के मुफ़ादात की तकमील करने की फ़िलहाल अगर ज़िद की जाती तो शायद मुल्क में वस्त मुद्दती इंतिख़ाबात हो जाते और इस का नतीजा क्या निकलता ये कोई नहीं कह सकता इस लिए इन कंपनीयों केलिए बेहतरी इसी में है कि फ़िलहाल कुछ इंतिज़ार किया जाय ताकि उन के मुफ़ादात की तकमील केलिए कोई और राह तलाश की जा सके ।

मिस्टर मुकर्जी के ख़िताब का मक़सद चाहे कांग्रेस अरकान-ए-पार्लीमैंट को पयाम देना था या फिर बैरूनी कंपनीयों को पयाम देना ये तो वही जानते हैं लेकिन ये बात बिलकुल वाज़िह होगई कि हुकूमत को वस्त मुद्दती इंतिख़ाबात का ख़ौफ़ यक़ीनन है ।

हुकूमत फ़िलहाल अवाम की अदालत में अपना मुक़द्दमा पेश करना नहीं चाहती । उसे यक़ीन है कि मुक़र्ररा वक़्त पर जब इंतिख़ाबात होंगे तो उस वक़्त तक अवाम को राग़िब करने केलिए हसब रिवायत कुछ वाअदे और कुछ तीक़नात से काम चला लिया जाएगा ।

लेकिन फ़िलहाल मुसलसल महंगाई कुरप्शन और दीगर मसाइल ने अवाम को हुकूमत बे बदज़न कर दिया है और हुकूमत को भी अब ये एतराफ़ होने लगा है चाहे बिलवासता ही क्यों ना हो। मौजूदा हालात हुकूमत को दावत देते हैं कि वो अपनी पालिसीयों का अज़ सर-ए-नौ जायज़ा ले और अवाम को बेशुमार मसाइल से नजात दिलाने के लिए इक़दामात करे ताकि उसे अवाम के दरमयान जाते हुए कभी ख़ौफ़ का एहसास ना होने पाए ।

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