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किताबों पर बिहार उर्दू अकादमी के इनामात का फैसला

ज़िंदा क़ौमें हमेशा ज़ुबान व सकाफत के तहफ़्फुज़ में सरगर्म अमल रहती हैं, वो ये बात जानती हैं के फनकारों और फनपारों के कदरदानी से सकाफत को एतबार भी मिलता है और इस्तहकाम भी। इन बातों का इज़हार करते हुये बिहार उर्दू अकादमी मे सेक्रेटरी जना

ज़िंदा क़ौमें हमेशा ज़ुबान व सकाफत के तहफ़्फुज़ में सरगर्म अमल रहती हैं, वो ये बात जानती हैं के फनकारों और फनपारों के कदरदानी से सकाफत को एतबार भी मिलता है और इस्तहकाम भी। इन बातों का इज़हार करते हुये बिहार उर्दू अकादमी मे सेक्रेटरी जनाब इम्तियाज़ अहमद करीमी ने मजीद कहा के बशऊर अक़वाम व अफराद और अदारों की हर जमाने में ये रवायत रही है के वो अरबाब इल्म व दानिश की पेशकश का कोई मौका जाये नहीं होने देतें। बिहार उर्दू अकादमी भी खुदा के फजल व करम और मेहबान उर्दू की दुवाओं से अपनी रवायतों के इस्तहकाम और अपने मंसूबों पर अमलदार आमद के लिए बेहद फआल व संजीदा है। गुजिशता 30 जनवरी 2014 की अहम मीटिंग में मसूदात पर आशाअति एमदाद और किताबों पर इनामात के फैसले हो चुके हैं। मसौदात पर आशाअति इनामात की रकमात के चेक भेजे जाने की तैयारी आखरी मराहल में है और किताबों पर मंजूरशुदा इनामात के ताल्लुक से भी दफ्तरी कार्रवाई जारी है।

जनाब करिमी ने एक सवाल के जवाब में कहा के बिहार और बाइरून बिहार के 119 मूसनाफीन व मूलफ़ीन के दरमियान 2012 की किताबों के लिए 500778 /- रुपए की मजमुई इनामी रकम तक़सीम की जाएगी। इनामात के लिए इंतिख़ाब याफ़्ता किताबों में शरयी, तहक़ीक़ व तनकीद इनशाया, इसलाहात व समाजीयात, अदब फसाने, मुजामीन नॉवेल, मर्सिये, तालीम व तदरिश, ताजियाती मुतलाआत, इसलाहात, सफरनामे और ड्रामे वगैरह ताल्लुक मतबुआत शामिल हैं और मर्द व ख़वातीन के इलावा गैर मुस्लिम अरबाब कलम भी शामिल हैं। इस सिलसिले की ज़रूरी मालूमात दफ्तरी औकात में हासिल की जा सकती हैं और वेब साइट www.biharurduacademy.org पर भी तफ़सीली देखी जा सकती है। इस सिलसिले की दीगर ज़रूरी तफ़सीलियात जल्द से जल्द अखबरात के जरिये उर्दू तक पहुंचाई जाएगी।

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