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किसानों का राजस्थान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, ज़मीन समाधि में मनाई दिवाली

पूरे भारत वर्ष में दिवाली को बहुत अच्छे तरीके से मनाया गया| हर जगह कुछ नया देखने को मिला जिसमें अयोध्या प्रमुख है| इस बार अयोध्या की दिवाली को इतिहास के पन्नों में लिखा जायेगा| लेकिन अगर इससे भी कुछ अलग हुआ है, कुछ अजीब तरीके से दिवाली मनाई गयी है तो वो राजस्थान के किसानों द्वारा मनाई गयी दिवाली है| हालाँकि ये इतिहास के पन्नों के लायक दिवाली नहीं थी लेकिन लोगों के दिलों को झकझोर देने वाली दिवाली ज़रूर कह सकते हैं|

राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास नींदड़ गांव के किसानों ने अनोखी दिवाली मनाई। जमीन समाधि में बैठी महिलाओं ने करवा चौथ से लेकर दिवाली और गोवर्द्धन पूजा इन्हीं गड्डों में बैठकर मनाया। भूमि अधिग्रहण के विरोध में 1350 किसान ज़मीन समाधि में लगभग 20 दिनों से बैठे हैं| उनका यह विरोध प्रदर्शन गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर से जारी है| इस ज़मीन समाधि विरोध प्रदर्शन में पुरुष ही नहीं बच्चे और महिलाएं भी गड्डे खोद कर उसमें गर्दन तक समाधि की अवस्था में बैठे हैं।

किसान जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित नींदड़ आवासीय योजना का विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है सरकार उनकी उपजाऊ जमीन को अपने कब्ज़े में  कर रही है और बदले में मुआवजा भी बहुत कम दे रही है। किसान चाहते हैं कि भूमि अधिग्रहण 2013 के नियमों के अनुसार हो लेकिन सरकार बरसों पुराने नियम के तहत ही मुआवजा दे रही है।

मौक़े की तलाश में विपक्ष भी इसका फायदा उठा रहे हैं| और इस आन्दोलन को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और साथ ही किसानों का इस आन्दोलन के लिए समर्थन कर रहे हैं|

कांग्रेस नेता नगेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार के लोग कहते हैं कि नींदड़ के किसान गड्डे खोद कर बैठे हैं, लेकिन सरकार के लोगों को पता होना चाहिए कि नींदड़ के किसान समाधि में बैठे हैं और समाधि जैसे पवित्र स्थल पर सत्याग्रह करते हुए इतनी ताकत पैदा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में सरकार ने इनकी बात नहीं मानी तो सरकार को इनहीं गड्डों में दफन कर देंगे। किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वे इसी जमीन में खुद को दफन कर लेंगे।

हालाँकि राजस्थान सरकार पर इस आन्दोलन का कुछ ज़्यादा असर नहीं दिख रहा| सरकार भी अपनी जिद पर अड़ी है। सरकार ने किसानों द्वारा मुआवजा राशि स्वीकार ना करने पर पैसा कोर्ट में जमा करवा दिया है। लेकिन राजस्थान सरकार के लिए ये आंदोलन धीरे धीरे एक बड़ी चुनौती बन कर उभर रहा है। यह आन्दोलन एक बड़ा रूप लेने लगा है| किसानों का कहना है कि जब तक सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण हमारी जमीन अधिग्रहण को निरस्त नहीं करेंगे तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा।

 

शरीफ़ उल्लाह

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