Monday , December 18 2017

कुल हिन्द किताब मेला बैंगलोर की शाम मज़ाह तक़ारीब

सुलेमान ख़तीब पर वहाब अंदलीब की किताब की इशाअत ,डाक्टर ख़्वाजा इकराम अलाहद्दीन और डाक्टर मुस्तफ़ा कमाल का ख़िताब

सुलेमान ख़तीब पर वहाब अंदलीब की किताब की इशाअत ,डाक्टर ख़्वाजा इकराम अलाहद्दीन और डाक्टर मुस्तफ़ा कमाल का ख़िताब
कुल हिंद किताब मेले के मौक़े पर काउंसल बराए फ़रोग़ उर्दू नई दिल्ली , कर्नाटक उर्दू एकेडेमी और अंजुमन ख़ुश दिलाँ कर्नाटक के ज़ेरे एहतिमाम शीवाजी नगर बैंगलोर के वसीअ मैदान में तंज़-ओ-मज़ाह की एक पर असर शाम मनाई गई। तंज़-ओ-मज़ाह से मुताल्लिक़ किताबों की रस्म इजरा , मज़ाहीया मुशायरा और मज़ाहीया मज़ामीन की महफ़िल पर मुश्तमिल ये तीन यादगार इजलास शाम 4 बजे से रात 10-30 बजे तक जारी रहे।

डाँक्टर ख़्वाजा इकराम अलाहद्दीन डायरेक्टर फ़रोग़ उर्दू काउंसल और डाक्टर सय्यद मुस्तफ़ा कमाल शगूफ़ा ने बहैसियत मेहमान ख़ुसूसी शिरकत की। इब्तिदा-ए-में जनाब वहाब अंदलीब साबिक़ सदर कर्नाटक उर्दू एकेडेमी की तसनीफ़ सुलेमान ख़तीब शायर और नस्र निगार की रस्म इजरा मेहमान ख़ुसूसी डाँक्टर मुस्तफ़ा कमाल शगूफ़ा ने अंजाम दी। डाँक्टर ज़ुबेदा बेगम ने सदारत की। डाँक्टर कमाल ने दक्कनी शायरी की रिवायत का ज़िक्र करते हुए सुलेमान ख़तीब को जदीद दक्कनी का मुस्तनद शायर क़रार दिया और बताया कि ख़तीब के मजमूआ कलाम के नौ एडीशन शाय होचुके हैं और अब तक 12 हज़ार से ज़्यादा किताबें फ़रोख़त होचुकी हैं।

उर्दू के हमअसर शाइरों में बहुत कम किसी को ये एज़ाज़ हासिल हुआ है। सुलेमान ख़तीब परियों तो बहुत कुछ लिखा जा चुका है लेकिन उनके रफीक ख़ास ख़ाका निगार-ओ-अदीब वहाब अंदलीब ने ख़तीब की शख्सियत और फ़न काँय ज़ावियों से जायज़ा पेश किया है। खासतौर से ख़तीब कैंसर निगारी पर ख़ासा मवाद फ़राहम किया गया है। फ़रोग़ उर्दू काउंसल के डायरेक्टर डाँक्टर ख़्वाजा इकराम अलाहद्दीन ने सहि माही तंज़-ओ-मज़ाह के ताज़ा शुमारों की रस्म इजरा अंजाम दी और कहा कि तंज़-ओ-मज़ाह लिखना बहुत मुश्किल काम है।

तंज़-ओ-मज़ाह निगार के लिये ज़रूरी है कि ज़बान पर उसे उबूर हासिल हो और मुआशरे पर भी उसकी नज़र हो। उन्होंने यक़ीन‌ दिया कि तंज़-ओ-मज़ाह के अदब के फ़रोग़ के लिये काउंसल अपना हिस्सा अदा करेगी। डाँक्टर इकराम अलाहद्दीन ने बैंगलोर में मुनाक़िदा सक़ाफ़्ती , तहज़ीबी जश्न और एक रोज़ा तंज़-ओ-मज़ाह की तक़रीबात की कामयाबी पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए कहा कि इस नवीत की तक़ारीब से शुमाल और जुनूब के उर्दू वालों को एक दूसरे के अदबी कारनामों से वाक़फ़ियत का मौक़ा मिलता है।

दोनों इलाक़ों के लोग एक दूसरे के तख़लीक़ी काम से कम वाक़िफ़ हैं , रब्त-ओ-इश्तिराक की कमी है। बल्कि ख़लीज हाइल है। उर्दू काउंसल सारे मुल्क के उर्दू वालों को जदीद टेक्नालोजी और उर्दू तहज़ीब-ओ-सक़ाफ़्त से एक साथ जोड़ने और उर्दू वालों को रोज़गार दिलाने के लिये कोशां है। जनाब रियाज़ अहमद साबिक़ रुकन कर्नाटक पब्लिक सरविस कमीशन ने डाँक्टर फौज़िया चौधरी की किताब लतीफ़ों का ख़ज़ाने की रस्म इजराई अंजाम दी।

इस मौक़े पर डाँक्टर ख़्वाजा इकराम अलाहद्दीन और डाँक्टर मुस्तफ़ा कमाल शगूफ़ा को उर्दू और तंज़-ओ-मज़ाह के फ़रोग़ के लिये अंजाम दी गई ख़िदमात का एतराफ़ करते हुए शाल पोशी और मोमनटो से नवाज़ा गया। जनाब वहाब अंदलीब ने शगूफ़ा का तआरुफ़ करवाते हुए बह हैसियत मुहक़्क़िक़ , उस्ताद और शगूफ़ा उनके कारनामों का ज़िक्र किया। दूसरे इजलास में डाँक्टर हलीमा फ़िर्दोस , डाँक्टर फौज़िया चौधरी , डाँक्टर फ़र्ज़ाना फ़रह , डाँक्टर रउफ़ ख़ुशतर और डाँक्टर तय्यब ख़रावी ने मज़ामीन सुनाए।

डाँक्टर फहीम अलाहद्दीन पीरज़ादा ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए। आख़िर में मज़ाहीया मुशायरा मुनाक़िद हुआ। जिस में शादाब बेधड़क मद्रासी , यूसुफ़ अछाड़ पछाड़ , राहत हरारत , असर जाफरी , हारून सेठ सलीम , अलिफ़ अहमद बर्क़ , नूर अलह‌द्दीन नूर , महमूद ख़ां केसर , अहमद शाह , मुश्ताक़ सय्यद और मुश्ताक़ अहमद मुश्ताक़ ने कलाम सुनाया। रात देर गए बैंगलोर में मुनाक़िदा अपनी नवीत की मुनफ़रद तक़ारीब नायाब सेक्रेटरी मैन समदानी के शुक्रिया पर इख़तेताम को पहुंची। अंजुमन ख़ुश दिलाँ कर्नाटक के सेक्रेटरी खलील अहमद और नायाब सदर मुनीर मसीहा ने जलसों के इंसिराम में हिस्सा लिया। अवाम का बेपनाह हुजूम तंज़-ओ-मज़ाह के इन जलसों में देखा गया।

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