Friday , September 21 2018

कुवैत में तौहीन रसालत ( स०अ०व०) पर सज़ाए मौत को आरिज़ी मंज़ूरी

कुवैत की पार्लीमैंट ने अल्लाह और पैग़ंबर इस्लाम की तौहीन पर सज़ाए मौत दिए जाने की आरिज़ी मंज़ूरी दे दी। ग़ैर मुल्की ख़बररसां इदारे के मुताबिक़ कुवैती अरकान-ए-पार्लीमेंट ने इन तरामीम की आरिज़ी मंज़ूरी दी, जिन के तहत पैग़ंबर इस्लाम की अजवाज-

कुवैत की पार्लीमैंट ने अल्लाह और पैग़ंबर इस्लाम की तौहीन पर सज़ाए मौत दिए जाने की आरिज़ी मंज़ूरी दे दी। ग़ैर मुल्की ख़बररसां इदारे के मुताबिक़ कुवैती अरकान-ए-पार्लीमेंट ने इन तरामीम की आरिज़ी मंज़ूरी दी, जिन के तहत पैग़ंबर इस्लाम की अजवाज-ए-मतहरात की तौहीन पर भी सज़ाए मौत रखी गई है। इस हवाले से होने वाली वोटिंग में काबीना के 15 अरकान समेत 46 अरकान-ए-पार्लीमेंट ने इन तरामीम के हक़ में वोट दिया। चार अरकान-ए-पार्लीमेंट ने इस क़ानून के ख़िलाफ़ वोट दिए जब कि तीन ने वोट नहीं डाला।

इन तरामीम के ख़िलाफ़ वोट देने वालों में शीया अरकान-ए-पार्लीमेंट शामिल थे, जिन्होंने मुतालिबा किया है कि नई तरामीम में इन के फ़िरक़े के बारह इमामों की तौहीन करने वालों के लिए भी सज़ाए मौत रखी जाए। इन तरामीम के मुकम्मल नफ़ाज़ के लिए वोटिंग का एक और मरहला करवाया जाएगा, जिसके बाद मुल्क के हुकमरान की मंज़ूरी भी ज़रूरी होगी।

अभी गुज़श्ता माह ही कुवैत में एक शीया मुस्लमान हमद अलंक़ी को गिरफ़्तार कर लिया गया था, जिस ने मुबय्यना तौर पर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर पैग़ंबर इस्लाम, उन की बीवीयों और बाअज़ इस्लामी शख़्सियतों की तौहीन की थी। मज़हबी नौईयत के जराइम पर सख़्त सज़ाओं की ये पेशरफ़्त इसी वाक्ये के बाद हुई है। मुतअद्दिद कुवैती अख़बारों में नक़ी के ख़िलाफ़ मुज़म्मती ईदारीये शाय हुए थे। हमद अलनक़ी ताहाल ज़ेर-ए-हिरासत है और इस के ख़िलाफ़ मज़ीद तफ़तीश और मुक़द्दमे की समाअत का अमल मुअत्तल है।

इसने पुलिस को बताया था कि दरअसल इस का ट्वीटर एकाऊंट हैक कर लिया गया और इस ने ख़ुद ऐसा कोई ब्यान पोस्ट नहीं किया था। नक़ी के ख़िलाफ़ मुज़ाहिरे भी हुए थे जबकि बाअज़ अरकान-ए-पार्लीमेंट ने इस को सज़ाए मौत दिए जाने का मुतालिबा किया था। कुवैत के मुतअद्दिद बड़े अख़बारों में नक़ी के ख़िलाफ़ मुज़म्मती ईदारीये भी शाय हुए थे जबकि बाअज़ अख़बारों ने सुनी कारकुनों पर ज़रूरत से ज़्यादा रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करने का इल्ज़ाम लगाया था। कुवैत में सुनी मुस्लमान अक्सरीयत में हैं जबकि 1।7 मिलीयन मुक़ामी आबादी का एक तिहाई शीया मुस्लमानों पर मुश्तमिल है।

वहां 1961 के पब्लीकेशन ला के तहत तौहीन रिसालत गै़रक़ानूनी है। हालिया क़ानून के मुताबिक़ इस के मुर्तक़िब को सज़ाए क़ैद का सामना करना पड़ता है, जिस की मुद्दत का इन्हेसार जुर्म की नौईयत पर है। दीगर मुल्कों की तरह कुवैत में भी ट्विटर सोशल नेटवर्किंग का मक़बूल ज़रीया है। वहां बहुत से सियासतदानों और सहाफ़ीयों से मुख़्तलिफ़ मकातिब-ए-फ़िक्र के लोग इसी के ज़रीये हालात हाज़रा पर बहस-ओ-मुबाहिसे करते हैं।

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