केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े का विवादित बयान, कहा- समाज सेवा करने राजनीति में नहीं आए

केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े का विवादित बयान, कहा- समाज सेवा करने राजनीति में नहीं आए
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केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा है कि हम यहां समाज सेवा नहीं करने आए हैं बल्कि राजनीति करने आए हैं. हेगड़े अपने विवादित बयानों के कारण पहले भी चर्चा में रह चुके हैं. कर्नाटक के करवर में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मंत्री ने कहा कि आपने हमारी पार्टी को वोट किया और आपके पसंद की पार्टी सरकार बनाएगी यह आपका अधिकार है. हम यहां सिर्फ राजनीति करने के लिए हैं. अगर हम यह न करें तो हम क्यों राजनीति में घुसे.

अनंत हेगड़े ने कहा, ‘राजनीति के कारण ही मैं एक सांसद बन पाया. हम राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं कर सकते हैं. हम यहां समाज सेवा करने नहीं आए हैं हम यहां राजनीति करने आए हैं इसलिए हम करते हैं. पत्रकार इसकी जैसी व्याख्या करना चाहते हैं वे कर सकते हैं.’

केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री राज्यमंत्री हेगड़े इससे पहले भी विवादित बयान देकर चर्चा में रह चुके हैं. पिछले साल उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि बीजेपी ‘संविधान बदलने के लिए’ सत्ता में आई है।

कोप्पल जिले एक कार्यक्रम के दौरान हेगड़े ने कहा था, ‘लोग धर्मनिरपेक्ष शब्द से इसलिए सहमत हैं, क्योंकि यह संविधान में लिखा है। इसे (संविधान) बहुत पहले बदल दिया जाना चाहिए था और अब हम इसे बदलने जा रहे हैं। जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, वे बिना माता-पिता से जन्मे की तरह हैं।’

50 वर्षीय केंद्रीय मंत्री ने कहा था, ‘अगर कोई कहता है कि मैं मुस्लिम, ईसाई, लिंगायत, ब्रह्मण या हिंदू हैं तो मुझे खुशी महसूस होती है, क्योंकि वे अपनी जड़ों को जानते हैं. जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, मैं नहीं जानता उन्हें क्या कहा जाए.’

हेगड़े को पिछले साल सितंबर महीने में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के क्रम में केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। वह उत्तर कर्नाटक निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार लोकसभा सदस्य चुने जा चुके हैं।

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हालांकि अनंत कुमार हेगड़े ने संविधान में संशोधन के अपने विवादित बयान पर लोकसभा के अंदर माफी भी मांगी थी और कहा था कि उनके बयान को ‘तोड़-मरोड़कर’ पेश किया गया। हेगड़े ने सदन में कहा था, ‘मैं संविधान, संसद और बाबासाहेब अंबेडकर का सम्मान करता हूं। संविधान मेरे लिए सर्वोच्च है। एक नागरिक के नाते मैं कभी भी इसके खिलाफ नहीं जा सकता।’

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