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केजरीवाल को डॉन मुख्तार से परहेज नहीं !

वाराणसी का इंतेखाबी मैदान बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। कई संगीन कत्लों के मुल्ज़िम् और फिलहाल आगरा जेल में बंद डॉन मुख्तार अंसारी वाराणसी के इंएखाबी मैदान से हट गए हैं। इस बीच, आम आदमी पार्टी के लीडर अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि रा

वाराणसी का इंतेखाबी मैदान बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। कई संगीन कत्लों के मुल्ज़िम् और फिलहाल आगरा जेल में बंद डॉन मुख्तार अंसारी वाराणसी के इंएखाबी मैदान से हट गए हैं। इस बीच, आम आदमी पार्टी के लीडर अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को हराने के लिए जो भी ताकत ताईद में आती हैं हम साथ लेने को तैयार हैं। यह भी सुर्खी बनी हुई है कि मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी और केजरीवाल के बीच दिल्ली में मुलाकात भी हुई है।

जुमेरात के रोज़अंसारी की पार्टी कौमी इत्तेहाद पार्टी के प्रेजिडेंड और मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि बनारस में सेक्युलर वोट बटे और नरेंद्र मोदी की जीत पक्की हो जाए। ऐसे में न मुख्तार न ही उनकी बीवी अफशा अंसारी वाराणसी से इलेक्शन लड़ेंगी। हालांकि, मुख्तार घोसी सीट से इलेक्शन लड़ेंगे।’

2009 के आम इंतेखाबात में भी डॉन मुख्तार अंसारी बनारस के चुनावी मैदान में थे। उन्होंने तब के बीजेपी कैंडिडेट मुरली मनोहर जोशी को सख्त टक्कर दी थी और महज 17 हजार वोटों से हारे थे। मुख्तार को पिछले इलेक्शन में तकरीबन 1,85,000 वोट मिले थे। पिछली बार आम इंतेखाबात के दौरान काशी में ‘जोशी जिताओ, मुख्तार हराओ’ का नारा चला था और इस सीट पर लड़ाई हिंदू बनाम मुसलमान हो गई थी और इसका फायदा जोशी को मिला।

यह भी सवाल है कि मुख्तार अंसारी के हटने से किसको फायदा होगा? इतना तो तय है कि अंसारी के हटने से मुस्लिम वोट अब किसी एक कैंडिडेट के साथ जाएगी और वह मोदी तो नहीं होंगे। बनारस के 2009 के इंतेखाबी नतीजे के बारे में कहा जाता है कि बीजेपी की जीत मुख्तार अंसारी ने ही तय की थी।

मुख्तार अंसारी की वजह से बनारस में रातोरात Communal polarization हुआ था और नतीजा मुरली मनोहर जोशी की तरफ गया था।

मुख्तार अंसारी के हटने से वाराणसी में मुस्लिम वोटों का बंटवारा थम सकता है, लेकिन Communal polarization के खदसे भी हो सकते है। अंसारी पूर्वांचल के जाने-माने गैंगस्टर रहे हैं। मुख्तार अंसारी पर पूर्वांचल में गुंडागर्दी के संगीन इल्ज़ाम हैं। पूर्वांचल में ठेके को लेकर होने वाले गैंगवार में मुख्तार अंसारी एक बड़ा नाम है।

वह फिहलाल मऊ से एमएलए हैं। हिन्दू खासकर सवर्ण हिन्दू (Upper caste) मुख्तार के मुखालिफ माने जाते हैं। ऐसे हालात में मुस्लिम वोट लेने के लिए मुख्तार अंसारी की ताइद हिन्दुओं के एक मजबूत तबके को नाराज करने का जोखिम कौन उठाएगा?

जुमे के रोज़ आम आदमी पार्टी के लीडर अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में कहा कि मोदी और राहुल गांधी को हराने के लिए जो भी ताकत ताईद में आती हैं हम साथ लेने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और राहुल गांधी के मुखालिफ सारी ताकतों को एक साथ आने की जरूरत है।

ज़राए के मुताबिक , अफजाल और केजरीवाल के बीच कई दौर की बातचीत हुई है और इस बात की उम्मीद है कि मुख्तार, केजरीवाल को अपनी ताईद दे सकते हैं। अगर मुख्तार अंसारी की ताईद ‘आप’ लेती है तो बनारस में एक बार फिर से Communal polarization का माहौल बन सकता है। लड़ाई का रुख मोदी बनाम केजरीवाल हो जाएगा।

अफजाल अंसारी मोदी के खिलाफ केजरीवाल को ही दमदार कैंडिडेट मान रहे हैं और उनका मन ‘आप’ को हिमायत करने का है। अफजाल ने कहा कि उनकी पार्टी पर इल्ज़ाम लग रहे हैं कि मुख्तार अंसारी को उतारने से सेक्युलर वोट बंट रहे हैं, ऐसे में सेक्युलर वोटों को मजबूत करने के लिए वह रेस से हट रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘अब यह एसपी, बीएसपी और कांग्रेस पर है कि वे मोदी को किस तरह से रोकना चाहते हैं, इसका फैसला करें। केजरीवाल का बनारस में अपना कोई बेस ( बुनियाद) नहीं है और न ही उनका कोई वोट बैंक है, लेकिन अगर अफजाल उन्हें ताईद कर देते हैं तो बनारस के तकरीबन चार लाख मुसलमानों की मदद से वह सीधे लड़ाई में आ सकते हैं।

केजरीवाल ने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि मोदी को हराने के लिए वह किसी की भी ताईद ले सकते हैं।

कांग्रेस के टिकट पर मोदी को बनारस के हराने का दावा कर रहे साबिक भाजपाई अजय राय की डॉन मुख्तार अंसारी से पुरानी अदावत है। मुख्तार अंसारी पर अजय राय के भाई अवधेश राय की 1991 में उनके घर के सामने कत्ल करने का इल्ज़ाम है। इसके बाद से अजय राय भी मुख्तार अंसारी के निशाने पर रहे। कोर्ट में गवाही के दौरान अजय राय पर भी मुख्तार पर हमला करवाने का इल्ज़ाम है। उस वक्त अजय राय बाल-बाल बच गए थे।

मुख्तार अंसारी पर 29 नवंबर 2005 में मोहम्मदाबाद से उस वक्त के बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय के कत्ल का भी इल्ज़ाम है। उस दिन कृष्णानंद राय अपने भतीजे की शादी में शरीक होने आबाई गांव गए हुए थे। वहीं राय की गोली मारकर कत्ल कर दिया गया था । कृष्णानंद राय उस वक्त पूर्वांचल में बीजेपी के ताकतवर लीडर थे।

राय मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के भाई को ही हराकर एमएलए बने थे। तब से वह मुख्तार अंसारी के निशाने पर थे। कृष्णानंद राय के कत्ल के बाद पूर्वांचल का माहौल बेहद तनाव वाला रहा।

ऐसे में मुख्तार केजरीवाल के साथ जाते हैं तो लड़ाई मोदी बनाम ‘आप’ होगी। अजय राय तीसरे नंबर पर आ जाएंगे। इस हालत में अजय राय की ज़ाति भी उन्हें किस बुनियाद पर ताईद करेगी? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर बीजेपी अजय राय को घेर सकती है। इन सवालों का जवाब देना अजय राय के लिए इतना आसान नहीं होगा।

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