Saturday , December 16 2017

केजरीवाल ही हैं फसाद की जड़ : मयंक गांधी

प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को ‘आप’ की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (पीएसी) से निकाल दिये जाने के बाद भी पार्टी में घमासान जारी है.

प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को ‘आप’ की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (पीएसी) से निकाल दिये जाने के बाद भी पार्टी में घमासान जारी है. क़ौमी आमिला के रूकन और महाराष्ट्र से पार्टी के बड़े लीडरों ने बागी रुख अख्तियार करते हुए सीधे-सीधे अरविंद केजरीवाल पर उंगली उठाई है. गांधी ने केजरीवाल पर संगीन इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि वही सारे फसाद की जड़ हैं और अगर बुध के रोज़ हुई बैठक के मिनिट्स जारी किए जाएं तो सारी बातें साफ हो जाएंगी.

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने साफ-साफ कह दिया था योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पीएसी में रहते हैं तो मैं काम नहीं कर पाऊंगा. मयंक गांधी ने ब्लॉग लिखकर यह भी कहा कि वह जानते हैं कि इस खुलासे से उन्हें भी इसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं, लेकिन वह इसके लिए तैयार हैं. मयंक के ब्लॉग पर तब्सिरा करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि आखिर सच सामने आ ही जाता है.

मयंक ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘प्यारे कारकुनों , मैं इस बाते के लिए माफी चाहता हूं कि क़ौमी आमिला में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में बाहर नहीं बोलने के हुक्म को तोड़ रहा हूं. वैसे, मैं पार्टी का डिसीप्लीन वाला सिपाही हूं. अरविंद कहते थे कि जब वे लोग 2011 में लोकपाल को लेकर जॉइंट ड्राफ्ट कमिटी में काम कर रहे थे तो कपिल सिब्बल उनसे कहा करते थे कि बाहरी दुनिया को कुछ न बताएं.

इसके जवाब में अरविंद कहा करते थे कि क़ौम को कार्रवाई के बारे में बताना उनकी पहली ड्यूटी है क्योंकि वह लीडर नहीं लोगों के नुमाइंदे हैं.’

उन्होंने आगे लिखा है, ‘क़ौमी आमिला में मैं सिर्फ कारकुनो के नुमाइंदे के तौर पर शामिल था और ऐसे में वह हुक्म मानकर मैं भी बेईमान बन जाऊंगा. पार्टी कारकुनों से है, इसलिए उन्हें चुनिंदा लीक और इधर-उधर के बयानों के बजाय सीधी मालूमात मिलनी चाहिए. मैं मीटिंग के हकाएक को आवामी तौर पर सामने रखना चाहता हूं. गुजश्ता रात मुझे कहा गया था कि अगर मैंने बाहर कुछ कहा तो मेरे खिलाफ तादीबी कार्रवाई की जाएगी, मैं प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को निकाले जाने का वाकिया मुख्तसर में बता रहा हूं और क़ौमी आमिला से गुजारिश करता हूं कि मीटिंग का पूरा ब्योरा सामने लाया जाए.’

उन्होंने बताया कि 26 तारीख को ही अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अगर पीएसी में रहेंगे तो उनके लिए काम करना मुश्किल है. मयंक के मुताबिक, ‘बैठक में दो फॉर्म्युले किए गए थे. पीएसी को फिर से बनाया जाए और नए रुकन का इंतेखाब फिर से हो. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव अपनी उम्मीदवारी नहीं रखेंगे. पीएसी काम करती रहे, लेकिन दोनों बैठक में हिस्सा न लें. बीच में कुछ दिनों के लिए बैठक रुकी. मनीष और दूसरे लोगों ने दिल्ली टीम आशीष खेतान, दिलीप पांडे और आशुतोष से बात की. बैठक दोबारा शुरू हुई तो मनीष ने योगेंद्र और प्रशांत को हटाने की पेशकश रखे. संजय सिंह ने तजवीज की हिमायत की.’

गौरतलब है कि बुध के रोज़ को तकरीबन साढ़े 5 घंटे मैराथन बैठक के बाद क़ौमी आमिला के 21 में से 19 रुकन के बीच वोटिंग हुई थी. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को हटाने की तजवीज की मुखालिफत में 8 और ताईद में 11 वोट पड़े. पार्टी की डिसीप्लीन कमेटी के चीफ प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. अगर किसी को कोई शिकायत है, तो वह पार्टी के लोकपाल के पास जा सकता है.

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