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कैराना सहित राज्य के अन्य स्थानों में फैले सांप्रदायिक तनाव के बारे में रिहाई मंच ने UP CM को लिखा पत्र

रिहाई मंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर  मांग की है कि राज्य में सांप्रदायिकता फैलाने वालों के लिए तत्काल प्रभाव से न्यायिक जांच आयोग का गठन करे और वर्तमान माहौल को देखते हुए रमजान में पूरे सूबे में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए।

प्रति,
मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ
महोदय,

संचार माध्यमों से ज्ञात हुआ कि आपने कैराना मुद्दे पर कहा है कि भाजपा नेता माहौल बिगाड़ रहें हैं और इन्हीं लोगों ने मुजफ्फरनगर दंगा कराया था। आपके संज्ञान में 16 दिसंबर 2013 की तहरीर जिसे अमीनाबाद थाने में भाजपा विधायक संगीत सोम के खिलाफ एफआईआर करने के लिए दी गई थी, को लाना चाहूंगा। इस तहरीर पर एफआईआर नहीं हुआ और ठीक ऐसे ही भाजपा सांसद हुकुम सिंह, भाजपा विधायक सुरेश राणा, भाजपा सासंद व कंेन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान इत्यादि द्वारा सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की कई शिकायतें लगातार दी गईं। सांप्रदायिकता जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन और शासन की गैरजिम्मेदारी के चलते 2013 में मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा हुई जिसको पिछले दिनों कैराना में फिर से दोहराने की कोशिश की गई। जब आप खुद मानते हैं कि भाजपा के लोगों ने सांप्रदायिक हिंसा करवाई तो आप पर भी सवाल उठना लाजिमी हैं कि जब प्रदेश में आपकी सरकार है तो ऐसे में यह जानते हुए भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। भाजपा विधायक संगीत सोम द्वारा ‘निर्भय यात्रा’ निकालने जैसी सांप्रदायिक कोशिश के लिए आपका शासन-प्रशासन जिम्मेदार है। क्योंकि संगीत सोम और सुरेश राणा पर लगे रासुका के खिलाफ आपके द्वारा की गई कमजोर पैरवी के कारण ही वो छूटे। इससे इन सांप्रदायिक तत्वों का आपराधिक हौसला और बढ़ा जो कैराना प्रकरण तक पहंुचा।

भारतीय जनता पार्टी के विधायक संगीत सोम, सुरेश राणा तथा भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने सन् 2013 में हिंदू और मुसलमानों के बीच दुश्मनी, घृणा तथा वैमनस्य की भावना को बढ़ाने का प्रयास करके मुजफ्फरनगर तथा शामली जिलों व आस-पास मंे सांप्रदायिक हिंसा कराई थी तथा संगीत सोम तथा सुरेश राणा ने दोनों संप्रदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। उक्त व्यक्तियों सहित भारतीय जनता पार्टी के सांसद योगी आदित्यनाथ, साक्षी महराज, निरंजन ज्योति, और साध्वी प्राची आदि समय-समय पर देश के मुसलमानों के विरुद्ध विष वमन करते हुए मुसलमानों की नागरिकता समाप्त करन,े उन्हें देश से बाहर भेज देने या सामूहिक जनसंहार द्वारा मुसलमानों को समाप्त कर देने का सार्वजनिक भाषण देकर देश की एकता, अखंडता तथा प्रभुता को खंडित करने का प्रयास करते रहते हैं जिससे हिंदू संप्रदाय के लोग आक्रामक तथा मुस्लिम समुदाय के लोग भयभीत तथा आतंकित होते हैं। उक्त समस्त व्यक्ति अपने भाषणों द्वारा बलवा कराकर भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाते हैं तथा बलवे में भाग लेने के लिए लोगों को भाड़े पर भी इकट्ठा करते हैं। यही लोग समय-समय पर मस्जिदों में सूअर का मांस तथा मंदिरों में गाय का मांस डलवा कर मंदिर-मस्जिद की पवित्रता को नष्ट करते हैं तथा हिंदू-मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से अभद्र और अपमानजनक शब्दों का उच्चारण करते हैं तथा ऐसा करने के लिए लोगों को उत्प्रेरित करते हैं।

साध्वी प्राची ने देश की एकता अखंडता को चोट पहंुचाने के उद्देश्य से मुस्लिम मुक्त भारत बनाने की घोषणा की। इसी बीच भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने धार्मिक विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से कैराना से विस्थापित हिंदुओं की एक सूची जारी की जिसको जी न्यूज चैनल तथा दैनिक जागरण समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित व प्रसारित कर प्रचारित किया एवं सोशल मीडिया पर इस समाचार को प्रमुखता से उछाला गया। इसका संज्ञान लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी की। सांप्रदायिक आधार पर हिदुओं के पलायन की हुकुम सिंह की सूची को रिहाई मंच ने फर्जी एवं भ्रामक बताते हुए उसमें दर्ज किए कुछ व्यक्तियों की हत्या 15-20 वर्ष पूर्व बताया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी तथा शासन-प्रशासन ने जांच के लिए अलग-अलग टीम गठित किया किन्तु जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ ने हिंदुओं के पलायन को लेकर सांप्रदायिक टिप्पणी की। एबीपी तथा एनडीटीवी समाचार चैनलों ने भी हुकुम सिंह द्वारा जारी की गई सूची पर सवाल उठाया। पुनः इलाहाबाद में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आहूत बैठक में नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, रविशंकर प्रसाद ने बैठक, रैली व प्रेस कांफ्रेस के जरिए भाजपा सांसद हुकुम सिंह द्वारा मीडिया में जारी कैराना से हिंदुओं के पलायन के मुद्दे को तूल देने के लिए टिप्पणी की। बाद में हुकुम सिंह ने कांधला से पलायन की एक और सूची जारी करते हुए पलायन को कानून व्यवस्था का प्रश्न बताया जिसे बिगाड़ने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है और इसी बीच योगी आदित्यनाथ के हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने के लिए पोर्न वीडियो देखने की संबन्धित खबरें संचार माध्यमों में छाईं रहीं। भाजपा ने चुनाव में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से हिंदू सेना जैसे अपने तमाम संगठनों से भड़काऊ प्रदर्शन करवाए तथा भाजपा विधायक संगीत सोम ने कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के उद्देश्य से निर्भय यात्रा की घोषणा की। योगी आदित्यनाथ द्वारा पुनः चार बच्चे पैदा न करने पर हिंदू माता-पिता को जेल में डाल देने की खबरें फिर से प्रसारित हुईं। भाजपा के प्रयास से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा एवं दो सम्प्रदायों के बीच बरेली, बाराबंकी व अन्य जगहों में तनाव पैदा करते हुए मारपीट भी हुई। कानून व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए भाजपा कार्यकताओं द्वारा सांप्रदायिकता फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर ‘मुस्लिम नेता का भड़काऊ भाषण’ कहकर एक फर्जी वीडियो प्रसारित किया गया। साध्वी प्राची ने आजमगढ़ में कहा कि आजमगढ़ आतंकवाद की जन्मस्थली व शरणस्थली है, यही से आतंकवाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में फैल गया। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या प्रकरण को फिर से तूल देने के लिए कहा कि बाबरी मस्जिद तोड़ते वक्त रोक नहीं पाए तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा। ठीक इसी तरह नरेन्द्र मोदी की मथुरा रैली के समय अयोध्या प्रकरण को तूल दिया गया और ये अराजक व्यक्ति व संगठन इस मसले पर सांप्रदायिक टकराव कराने का पूरा षड़यंत्र आगामी चुनावों में वोटों का लाभ पाने के लिए कर रहे हैं। साध्वी प्राची और अन्य हिन्दुत्वादी नेता बहुसख्यकों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ खड़ा करने के लिए यूपी को इस्लामिक स्टेट बनाया जा रहा है, जैसे भड़काऊ भाषण दे रहे हैं।

उपरोक्त घटनाओं का यह सिलसिला पुष्ट करता है कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश को सांप्रदायिक हिंसा में झोंक देने के लिए भाजपा, संघ व उनके सहोदर संगठनों द्वारा आपराधिक षडयंत्र रचा जा रहा है। इसे पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के समय दादरी में व मई में आजमगढ़ में हुई सांप्रदायिक हिंसा में देखा जा सकता है। यदि इस प्रचार को रोकने तथा झूठा प्रचार कर देश की एकता व अखंडता पर चोट पहंुचाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई न की गई तो किसी भी समय प्रदेश तथा देश की स्थिति भयावह हो सकती है।

हम रिहाई मंच की तरफ से मांग करते हैं कि राज्य सरकार तत्काल प्रभाव से न्यायिक जांच आयोग का गठन करे। वर्तमान माहौल को देखते हुए रमजान में पूरे सूबे में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए।

दिनांक- 21 जून 2016

द्वारा-

राजीव यादव

महासचिव रिहाई मंच

110/46 हरिनाथ बनर्जी स्ट्रीट,

नया गांव ईस्ट लाटूश रोड लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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