Thursday , September 20 2018

कोमा में मुबतला टीचर ज़हूर उद्दीन के लिए इमदाद की अपील

नुमाइंदा ख़ुसूसी------ ज़िंदगी में कब क्या हो जाए इस बारे में किसी को कोई अंदाज़ा नहीं होता। हालात बदलने के लिए चंद लमहात ही काफ़ी हैं। मिनटों में हंसते खेलते घर बर्बाद हो जाते हैं। अमीर, फ़क़ीर और फ़क़ीर अमीर बन जाते हैं लेकिन हरहाल में इंस

नुमाइंदा ख़ुसूसी—— ज़िंदगी में कब क्या हो जाए इस बारे में किसी को कोई अंदाज़ा नहीं होता। हालात बदलने के लिए चंद लमहात ही काफ़ी हैं। मिनटों में हंसते खेलते घर बर्बाद हो जाते हैं। अमीर, फ़क़ीर और फ़क़ीर अमीर बन जाते हैं लेकिन हरहाल में इंसान को बारगाह रब्बुल इज़्जत में शुक्र बजा लाना चाहीए खासतौर पर सेहत के मुआमला में अल्लाह ताला का जितना शुक्र किया जाये कम है।

जिस घर में कोई बीमार हो जाए और ऐसा बीमार के हालत कोमा में चला जाये तो उस घर के हालात क्या होंगे। इस बारे में सोच कर ही दिल काँप जाता है। मेह्दीपट्नम के रहने वाले जनाब ज़हूर उद्दीन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। 48 साला ज़हूर उद्दीन दो बेटों और एक बेटी के वालिद हैं।

बेटी बी यू एम एस कर रही है। टीचर की हैसियत से वो ख़िदमात अंजाम दे रहे थे लेकिन 25 जनवरी 2014 को जब कि वो यौमे जम्हूरीया तक़रीब की तैयारीयों में मसरूफ़ थे कि अचानक ऐसे बीमार हुए कि अब तक हालत कोमा में है। उस वक़्त डाक्टरों के मश्वरे पर उन्हें निज़ाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साईंस मुंतक़िल किया गया जहां वो 18 अप्रैल तक रहे।

इस दौराने इलाज पर 8 लाख और अदवियात वगैरह पर 10 लाख रुपये के मसारिफ़ आए और ये सारी रक़म का क़र्ज़ लेकर इंतेज़ाम किया गया। अब वो घर पर ही हैं। इस ख़ानदान के मआशी हालात ठीक नहीं हैं। चीफ मिनिस्टर रीलीफ़ फ़ंड से भी इमदाद हासिल करने की कोशिश की गई लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। अदवियात और दीगर मसारिफ़ इस क़दर ज़्यादा हैं कि उन लोगों का गुज़ारा भी मुश्किल हो गया है।

घर का किराया भी अदा करने से क़ासिर हैं। इन हालात में मुहम्मद ज़हूर उद्दीन की अहलिया और बच्चों ने हमदर्दने मिल्लत से तआवुन की अपील की है। इस मुसीबत ज़दा ख़ानदान की मदद के ख़ाहां अफ़राद सेल नंबर 9700382878 पर मुहम्मद ज़हूर उद्दीन की अहलिया या बच्चों से रब्त कर सकते हैं। उन का अकाउंट नंबर इस तरह है—–
Mohammed Zahooruddin
A/C.No. 083510100069860
Andhra Bank, Karwan Branch, Hyd-28. Branch Code-0835

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