Wednesday , December 13 2017

कोयले का गैर कानूनी कारोबार फिर शुरू

चार साल तक कोयला इलाक़े में कोयले का गैर कानूनी धंधा तकरीबन बंद रहा। लेकिन इसी नवंबर माह से यह गैर कानूनी कारोबार फिर शुरू हो गया है। यह गैर कानूनी कारोबार मंसूबा बंदी तरीके से चलता है। एक बड़ा गिरोह इसमें सरगरम है। कोयला के गैर कानू

चार साल तक कोयला इलाक़े में कोयले का गैर कानूनी धंधा तकरीबन बंद रहा। लेकिन इसी नवंबर माह से यह गैर कानूनी कारोबार फिर शुरू हो गया है। यह गैर कानूनी कारोबार मंसूबा बंदी तरीके से चलता है। एक बड़ा गिरोह इसमें सरगरम है। कोयला के गैर कानूनी कारोबारियों का एक बड़ा चेन है। यह चेन बोकारो के नक्सल मुतासीर नवाडीह से शुरू होकर धनबाद जिले के बाघमारा, बरवाअड्डा, राजगंज, तोपचांची से होते हुए गिरिडीह और जामताड़ा जिलों तक है। ‘खादी’ और ‘खाकी’ के बेजोड़ मेल से डंके की चोट पर शुरू हुए इस धंधे की वजह से हर माह तकरीबन 10 करोड. रुपये की कोल की लूट हो रही है। जानकारों की मानें, तो जिस रफ्तार में गैर कानूनी कोयला का यह धंधा शुरू हुआ है, अगर यही रफ्तार रही, तो साल पूरा होते-होते यानी नवंबर, 2014 तक 150 करोड़ से ज़्यादा की लूट हो चुकी होगी। जानकार बताते हैं कि कोयले के गैर कानूनी कारोबार से कमाये गये पैसे का इस्तेमाल अगले एसेम्बली इंतिख़ाब में दिखेगा।

सूबे के वज़ीर के बेटे और वज़ीर के करीबी बताने वाला एक लीडर धनबाद में गैर कानूनी कोल कारोबारियों को तहफ्फुज दे रहा है। थाना से लेकर भट्ठा तक नेताजी मैनेज करने में लगे रहते हैं। नेताजी थाना लेवल तक वज़ीर और उनके बेटे की धौंस देकर सेटिंग करते हैं। गैर कानूनी कोल कारोबारी से रकम लेकर पैसे की वसूली कर पहुंचाते हैं। बाघमारा, बरोरा, खरखरी समेत दीगर इलाके के कोलियरी और आउटसोर्सिंग का कोयला भठ्ठों में पहुंच रहा है। डीओ ट्रक की आड़ में कोलियरी और आउटसोर्सिंग पैच से कोयला निकाला जाता है। कारोबार में ट्रांसपोर्टरों की भी मिलीभगत रहती है। बाघमारा थाना में तीन माह पहले इस तरह का केस दर्ज हुआ था।

कैसे चलता है गैर कानूनी धंधा

कोयले का यह कारोबार दो तरह से हो रहा है। एक-बीसीसीएल की मुखतलिफ़ आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट से कोयला चोरी और दूसरे गैर कानूनी तरीके से कोयला कानकुनी। ज़राये बताते हैं कि नवंबर, 2013 से बाघमारा डिवीजन में शुरू हुए कोयला के गैर कानूनी कारोबार को रियासत के सियासी पार्टियों के लीडरान का तहफ़्फुज़ है। इसमें इक्तिदार पार्टी के लीडर भी हैं। थाना से लेकर आला पुलिस अफसरों को लीडरों की तरफ से सीधे फोन कर दबाव दिया जाता है। इस धंधे में शामिल लोगों ने लीडरों और इस काम में मदद करनेवाले पुलिस अफसरों के लिए ‘मंथली’ रकम फिक्स कर दी है।

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