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कौंसल हाल में कार्पोरेटर्स के लिए तर्जुमा की मशीनों की तंसीब

हैदराबाद २८ फरवरी (सियासत न्यूज़) जी ऐच एमसी हदूद में अवामी मसाइल की यकसूई के लिए मुंतख़ब होकर आएकार्पोरेटर्स की मादरी ज़बान के मासिवा-ए-दीगर ज़बानों से अदम वाक़फ़ीयत को देखते हुए कौंसल हाल में उन के लिए अंजानी ज़बानों का तर्जुमा

हैदराबाद २८ फरवरी (सियासत न्यूज़) जी ऐच एमसी हदूद में अवामी मसाइल की यकसूई के लिए मुंतख़ब होकर आएकार्पोरेटर्स की मादरी ज़बान के मासिवा-ए-दीगर ज़बानों से अदम वाक़फ़ीयत को देखते हुए कौंसल हाल में उन के लिए अंजानी ज़बानों का तर्जुमा पेश मशीन Simultaneous Interpretation System (SIS) की तंसीब अमल में लाई जा रही है।

ये मशीन कार्पोरेटर्स को इस ज़बान का बरवक़्त तर्जुमा पेश करेगी जिस से वोवाक़िफ़ नहीं हैं। ये मशीनें बलदिया के कौंसल हाल में नसब की जाएंगी जो तेलगू ज़बान का उर्दू और दीगर ज़बानों में तर्जुमा पेश करेगी।

इस तरह की मशीनें असम्बली में भी नसब हैं लेकिन वो केबल वाइरस से मरबूत हैं जबकि जी एच एमसी के कौंसल हाल में नसब की जा रही तर्जुमा की मशीनें वायर लस होंगी। ये मशीनें जुमला 1.09करोड़ रुपय के मसारिफ़ से नसब की जा रही हैं। अगर क़ानून में कार्पोरेटर्स के लिए मादरी ज़बान के इलावा इलाक़ाई ज़बानों से वाक़िफ़ रहने की शर्त होती तो शायद 1.09करोड़ रुपय की ख़तीर रक़मइन मशीनों की ख़रीदी पर ख़र्च करनी नहीं पड़ती।

बताया जाता है कि मेयर मोहम्मद माजिद हुसैन के इलावा दीगर कई कारपॊरेट्र्स उर्दू ज़बान से वाक़फ़ीयत रखते हैं जबकि कांग्रेस तेलगूदेशम‌ और बी जे पी के कारपॊरेट्र्स को उर्दू और हिन्दी ज़बान समझ में नहीं आती। मादरी ज़बान से हट कर कोई और ज़बान से कार्पोरेटर्स की अदम वाक़फ़ीयत की वजह से अवामी मसाइल की यकसूई में पेश आरही मुश्किलात को देखते हुए कौंसल हाल में तर्जुमा मशीनें नसब करवाने का फ़ैसला किया गया है। पहले ही बलदिया के बिला वजह के खर्चे क्या कम थे जो सरकारी ख़ज़ाना पर तर्जुमा की मशीनों की ख़रीदी का नया माली बोझ डाल दिया गया।

बताया जाता है कि बलदिया की असटानडनग कमेटी ने कौंसल हाल में वायर वाले या वायर लस SISमशीनें नसब करने की तजवीज़ को मंज़ूरी भी दे दी ही। इन आलात की ख़रीदी के लिए M/s. Atluri & Co.का इंतिख़ाब किया गया है जिस ने असम्बली नैशनल इंस्टीटियूट आफ़ रूरल डेवल्पमेन्ट और पुलिस एकेडेमी में भी ऐसी मशीनें नसब की हैं। बताया जाता है कि जी एच एमसी के ओहदेदार केबल वायर वालीऐस आई एस मशीनों की तंसीब पर एतराज़ कर रहे हैं क्योंकि उस की वजह से दीगर काम भी करवाने पड़ेंगे जिस से बलदिया पर मज़ीद 20लाख रुपय का बोझ पड़ेगा। अगर एस आई एस मशीनें वायर लस होंगी तो कौंसल हाल की टैंक बंड रोड पर वाक़्य मुतबादिल इमारत में मुंतक़ली की सूरत में इन मशीनों की मुंतक़ली में भी आसानी होगी।

बहरहाल उम्मीद है कि कम अज़ कम उन तर्जुमा की मशीनों की तंसीब के बाद कार्पोरेटर्स अवामी मसाइल की बरवक़्त यकसूई कर पाएगी।

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