Thursday , July 19 2018

क्या जिस्म फरोशी को क़ानूनी बना देना चाहिए?

ऐसा कम ही होता है कि कि आज़ाद ख़्याल तसव्वुर किए जाने वाला अख़्बार गार्डीयन एमनेस्टी इंटरनेशनल के ख़िलाफ़ सख़्त मौक़िफ़ अख़्तियार करे। मगर गुज़िश्ता हफ़्ते इन्होंने इन्सानी हुक़ूक़ की इस तंज़ीम के ख़िलाफ़ एक धुआँ-धार इदारिया शाय किया।

उनका कहना था कि एमनेस्टी ने अगर जिस्म फरोशी को क़ानूनी बनाने की कोशिश के लिए मुहिम चलाएगी तो ये एक बहुत बड़ी ग़लती होगी। एमनेस्टी की इंटरनेशनल कौंसिल मंगल को इस बारे में फ़ैसला करने वाली है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की अपनी कौंसिल के लिए तजावीज़ पर मबनी एक दाख़िली खु़फ़ीया पॉलिसी पेपर के मंज़रे आम पर आने के बाद सिर्फ गार्डीयन ही नहीं बल्कि ख़वातीन के हुक़ूक़ के लिए काम करने वाली तंज़ीमें और मारूफ़ अदाकाराएं भी तंज़ीम के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रही हैं।

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