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क्या झींगा खाना “हलाल” या “हराम” है? जामिया निजामिया में “सीफ़ूड” पर हुई चर्चा!

हैदराबाद: हैदराबाद के प्रसिद्ध इस्लामिक विश्वविद्यालय, जामिया निजामीया ने रविवार, 11 फरवरी को “सीफ़ूड इन द लाइट ऑफ़ शरिया” पर 10 बजे एक शैक्षणिक चर्चा आयोजित की।

मौलाना मोहम्मद ख़ाजा शरीफ़ ने क्रैब, मगरमच्छ और झींगे पर एक पेपर पेश किया, मौलाना जियाउद्दीन नक्शबंदी ने “सीफ़ूड इन द लाइट ऑफ़ शरिया”, प्रोफेसर बदीउद्दीन सबरी ने “मशीनों पर जानवरों की हत्या करना और स्थलीय पशुओं की अनुमति” पर, मौलाना मोहम्मद लेतीफ अहमद ने शरिया के खानपान में ‘हराम’ और ‘हलाल’ पर अपने पेपर पेश किए।

श्री सैयद अहमद अली, सचिव, जामिया निजामिया ने इस सेमिनार में भाग लेने के लिए पुराने छात्रों, विद्वानों और अन्य लोगों से अनुरोध किया।

यह उल्लेख किया जा सकता है कि 1 जनवरी 2018 को, जामिया निजामिया ने झींगे खाने के खिलाफ फतवा जारी किया था। जामिया निजामिया के मुफ्ती मुफ्ती, मोहम्मद अज़ीमुद्दीन द्वारा फतवा जारी किया गया था। हालांकि, कई मुस्लिम मौलवियों ने इस फतवे से असंतोष व्यक्त किया।

फतवा के अनुसार, झींगे मछली की श्रेणी के नहीं होते हैं और यह एक आर्थथोपॉड है। मुफ्ती मोहम्मद अज़ीमुद्दीन ने ‘मकरू-ए-तहरिम’ श्रेणी के तहत झींगा को रखा है।

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