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क्या दूध का ज़ाइद इस्तेमाल सेहत के लिए मुज़िर ( नुक्सानदेह) है?

लंदन, 22मई: ( एजेंसी) क्या हमेशा दूध पीते रहना हमारी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है?

लंदन, 22मई: ( एजेंसी) क्या हमेशा दूध पीते रहना हमारी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है? सवाल अजीब सा है लेकिन इसका जवाब सेहत से मुताल्लिक़ तशवीश रखने वालों के लिए हैरानकुन ज़रूर होगा। भला ऐसा कोई माहिर सेहत होगा जो दूध की इफ़ादीयत से इनकार करसके या ये इद्दिआ करे कि दूध मुकम्मल ग़िज़ा नहीं है।

ताहम दूध बच्चों की मर्ग़ूब ग़िज़ा होने के बावजूद कुछ लोगों को सख़्त नापसंद होता है जिन में बच्चे भी शामिल हैं। अक्सर ये कहा जाता है कि दूध की बू भी नापसंदीदा होती है लेकिन ये बात वसूक़ से नहीं कही जा सकती। दूध के ज़ाइद इस्तेमाल से दस्त लग जाने का अंदेशा पैदा हो जाता है।

शीरख़ार बच्चे भी अपनी माँ का दूध तो हज़म कर सकते हैं लेकिन अगर बात डिब्बे के दूध या भैंस और गाय के दूध की आ जाए तो बच्चों को ये दूध पिलाने से परहेज़ किया जाता है क्योंकि वो उस को जल्द हज़म नहीं कर सकते और दस्त-ओ-पेचिश के अंदेशे पैदा हो जाते हैं।

दूध से बनी आइसक्रीम बच्चों की मर्ग़ूब ग़िज़ा होती है लेकिन अगर उन्हें घर पहुंच कर जब बाज़ारी आइसक्रीम के बजाय एक गिलास दूध पेश किया जाये तो वो दूध पीने में इस रग़बत का इज़हार नहीं करते जो दूध से बनी आइसक्रीम के लिए करते हैं। बहरहाल दूध का इस्तेमाल भी एतिदाल के साथ ही सेहत की तमानीयत हो सकता है वर्ना हर वो चीज़ जो अपनी मिक़दार से ज़ाइद इस्तेमाल की जाये वो सेहत पर मुसबत असरात मुरत्तिब कर सकती है।

दूध से मुताल्लिक़ कहावतें भी बहुत हैं जैसे दूध का जला छाछ फूंक फूंक कर पीता है और दूध के दाँत अभी टूटे नहीं दूध का दूध पानी का पानी। इन सब कहावतों के ज़रीया भी दूध के ख़ालिस होने की दलालत की जाती है। बहरहाल सेहत और कहावतों का कोई रब्त नहीं है।

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