क्या ‘मस्जिद अल अक़्सा’ के खिलाफ़ बड़ी साजिश रच रहा है इजराइल?

क्या ‘मस्जिद अल अक़्सा’ के खिलाफ़ बड़ी साजिश रच रहा है इजराइल?
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फिलिस्तीनी क्षेत्रों विशेषकर मस्जिदुल अक्सा सहित दूसरे क्षेत्रों व स्थानों पर वर्चस्व जमाने के लिए अतिवादी ज़ायोनियों की गतिविधियों का ख़तरनाक चरण आरंभ हो गया है। अतिवादी ज़ायोनी मस्जिदुल अक्सा को ध्वस्त करके उसके स्थान पर एक उपासना स्थल का निर्माण करना चाहते हैं।

इन अतिवादी ज़ायोनियों ने मस्जिदुल अक्सा को दो हिस्सों में विभाजित करने के लिए एक ख़तरनाक योजना पेश की है। अतिवादी ज़ायोनी गुटों की योजना के अनुसार मस्जिदुल अक्सा को दो भागों में बांट दिया जाना चाहिये।

एक यहूदियों के लिए और दूसरा मुसलमानों के लिए। इस प्रकार से कि नमाज़ पढ़ने का जो स्थान पहले था वही मुसलमानों के लिए हो जबकि अतिवादी जायोनियों की योजना के दूसरे भाग में आया है कि सख़्रह गुंबद को ध्वस्त करने के बाद मस्जिदुल अक्सा का नियंत्रण यहूदियों के हाथ में चला जायेगा और वे नौ दरवाज़ों से मस्जिद में प्रवेश कर सकते हैं और शायद मुसलमानों को भी इन दरवाज़ों से प्रवेश करने की अनुमति दी जाये और वह भी केवल साढ़े चार घंटों के लिए और मुसलमान केवल असबात द्वार से इस मस्जिद में प्रवेश कर सकते हैं वह भी केवल देखने के लिए नमाज़, दुआ और उपासना के लिए नहीं और उसके बाद उन्हें मस्जिद से बाहर निकाल दिया जायेगा।

फिलिस्तीनी क्षेत्रों विशेषकर मस्जिदुल अक्सा सहित दूसरे क्षेत्रों व स्थानों पर वर्चस्व जमाने के लिए अतिवादी ज़ायोनियों की गतिविधियों का ख़तरनाक चरण आरंभ हो गया है। अतिवादी ज़ायोनियों के इस ख़तरनाक षडयंत्र पर फिलिस्तीनियों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। जारी वर्ष में मस्जिदुल अक्सा के अपमान पर आधारित ज़ायोनियों की कार्यवाहियों में वृद्धि हो गयी है।

अतिवादी ज़ायोनियों ने मस्जिदुल अक्सा के संबंध में जो ख़तरनाक योजना पेश की है वह इस बात की सूचक है कि जायोनी अधिकारियों एवं अतिवादी गुटों की ख़तरनाक योजना व कार्यक्रम महीनों पहले आरंभ हो चुका है और अतिवादी ज़ायोनियों ने मस्जिदुल अक्सा के समय और स्थान के विभाजन के संबंध में जो कार्यक्रम पेश किया है उसका लक्ष्य मुसलमानों को इस पवित्र मस्जिद से बाहर करना है।

इसके अलावा यहूदियों की ईद के अवसरों पर भी मुसलमानों को इस मस्जिद में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। दूसरे शब्दों में समय की दृष्टि से साल के 200 दिनों में अतिवादी यहूदी व ज़ायोनी मुसलमानों को मस्जिदुल अक्सा में प्रवेश की अनुमति नहीं देगें जबकि स्थान की दृष्टि से मस्जिदुल अक्सा का 60 प्रतिशत से अधिक भाग जायोनियों के अधिकार में होगा।

शोचनीय बिन्दु यह है कि अगर अतिवादी ज़ायोनियों की यह योजना व्यवहारिक हो गयी तो मस्जिदुल अक्सा को पूर्णरूप से ध्वस्त करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा और यह वही कार्य होगा जो ज़ायोनियों का लक्ष्य है यानी मस्जिदुल अक्सा को पूर्णरूप से ध्वस्त करना।

बहरहाल मस्जिदुल अक्सा को ध्वस्त करने की दिशा में अतिवादी जायोनियों द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों और फिलिस्तीनियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन हैं।

साभार- ‘parstoday.com’

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