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क्या लालू सिर्फ यादवों के लीडर हैं?

पटना : लालू यादव को आजकल अपनी ही जाति के लोगों का हिमायत हासिल है। दूसरी जातियों में उनके वोटर बहुत कम हैं। लेकिन 1990 के देहाई में ऐसा नहीं था। बिहार का वजीरे आला बनने के बाद लालू काफी मक़बूल लीडर थे। उन्हें कई जातियों का हिमायत हासिल था। 1995 और 2000 में उन्हें कई जातियों का वोट मिला था। उस दौर में लालू बिहार के वजीरे आला ओहदे के लिए और लोगों के दरमियान सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले लीडर थे। 20 फ़ीसद वोटर उन्हें वजीरे आला के तौर पर पसंद कर रहे थे।

वजीरे आला के लिए उन्हें 14 फ़ीसद राजपूत, 12 फ़ीसद कायस्थ, 20 फ़ीसद नाई, 18 फ़ीसद तेली, 15 फ़ीसद केवट जाति के लोगों ने पसंद किया था। इसके अलावा दीगर पसमानदा तबके के 21 फ़ीसद लोग लालू को वजीरे आला के तौर पर देखना चाहते थे। दलितों में 18 फ़ीसद लोग उन्हें वजीरे आला के तौर पर देखना चाहते थे। हालांकि सबसे ज़्यादा उन्हें यादव और मुस्लिमों का हिमायत हासिल था।
62 फ़ीसद यादव और 44 फ़ीसद मुसलमान उन्हें वजीरे आला के तौर पर देखना चाहते थे।

 

 

 

 

बाशुक्रिया : बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम 

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