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क्या हुकूमत दहशतगर्द को बढ़ावा दे रही है : हाईकोर्ट

इलाहाबाद, २३ नवंबर: दहशत गर्दाना वाकियात में शामिल लोगों पर से मुकदमा उठाने की हुकूमत की कवायद पर हाईकोर्ट ने सख्त तंकीद की है। कोर्ट ने कहा कि ‘यह कौन तय करेगा कि दहशगर्द कौन है। जब मामला कोर्ट में है तो अदालत को तय करने दीजिए। हुक

इलाहाबाद, २३ नवंबर: दहशत गर्दाना वाकियात में शामिल लोगों पर से मुकदमा उठाने की हुकूमत की कवायद पर हाईकोर्ट ने सख्त तंकीद की है। कोर्ट ने कहा कि ‘यह कौन तय करेगा कि दहशगर्द कौन है। जब मामला कोर्ट में है तो अदालत को तय करने दीजिए। हुकूमत खुद कैसे तय कर सकती है कि कौन दहशतगर्द है।

दहशतगर्दों पर से मुकदमा हटाने की पहल कर क्या सरकार दहशतगर्द को बढ़ावा दे रही है। आज आप आतंकवादियों को छोड़ देंगे, कल उन्हें पद्यभूषण देंगे।’ संकट मोचन मंदिर, कैंट स्टेशन समेत वाराणसी के मखतलिफ जगहों पर बम ब्लास्ट, रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर दहशतगर्द हमला जैसी वारदातों में शामिल लोगों पर से केस उठाने की कवायद को चलेंज देने वाली दरखास्त पर सुनवाई के दौरान जस्टिस आर के अग्रवाल और आरएसआर मौर्या की बेंच ने यह तंकीद की। इस मामले को लेकर वाराणसी के नित्यानंद चौबे और सामाजिक कारकुन राकेश न्यायिक ने मुफाद ए आम्मा कि अर्जी दाखिल की है।

दर्खास्त पर बहस कर रहे वकील शशिशंकर त्रिपाठी का कहना था कि सात मार्च 2006 को वाराणसी के संकट मोचन मंदिर, कैंट स्टेशन, लंका और दशाश्वमेघ घाट पर सीरियल बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें शामिल रहे दहशतगर्द वलीउल्ला और शमीम पर से हुकूमत मुकदमा वापस लेने की तैयारी कर रही है।

जबकि वलीउल्ला को पुलिस ने फूलपुर इलाहाबाद से गिरफ्तार किया था। उसने ब्लास्ट में अपना हाथ होने की बात को भी कुबूल किया । उसकी निशानदेही पर कई बरामदगियां की गई हैं। रियासती हुकूमत ने इस्तिगाशा (Prosecution) आफिसरों से मुकदमा वापसी के ताल्लुक में रिपोर्ट मांगी है।

इससे पहले रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में शामिल रहे लोगों पर मुकदमा उठाने के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। दर्खास्त में मांग की गई थी कि रियासती हुकूमत को 31 अक्टूबर 2012 को इस्तिगाशा वापसी का हुक्म वापस लेने का हिदायत दी जाए। बंच ने हुकूमत से इस बावत अपनी सूरत ए हाल वाजेह करने को कहा है।

दरखास्त पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। इसी तरह से रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर आतंकवादी हमले के मामले में दाखिल मुफाद ए आम्मा की अर्ज़ी पर भी कोर्ट ने हुकूमत को अपना फरीक़ बताने का हिदायत दी है। इस दर्खास्त पर 29 नवंबर को सुनवाई होगी।

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