Tuesday , November 21 2017
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क्यूँ ना अर्नब गोस्वामी को ही बैन कर दिया जाए?

कभी कभी मैं सोचता हूँ कि जो लोग अर्नब गोस्वामी के प्रोग्राम में अपनी बात रखने जाते होंगे और फिर वापिस आते होंगे उन्हें कैसा महसूस होता होगा. मतलब जैसे ग़ुलामी और आज़ादी की बात, अर्नब अपने प्रोग्राम में ख़ुद ही बोलते हैं किसी और को तो बोलने नहीं देते. इतना भी नहीं वो पहले तो सवाल पूछते हैं और फिर अगला कुछ कहे ख़ुद ही बोलने लगते हैं और फिर कहते हैं “नेशन वांट्स टू नो” मतलब देश जानना चाहता है. आख़िर ये देश जानना क्या चाहता है अर्नब जी, क्या आपने अपने ही आपको देश समझ लिया है क्या? जो आप जानना चाहते हैं वही देश जानना चाहता है. बहरहाल..

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गोस्वामी साहब की एक और ख़ासियत है रोज़ किसी ना किसी को बैन करने की बात करते रहते हैं, वैसे टाइम्स नाउ जो इनका चैनल है वो और भी बहुत कुछ करता रहता है लेकिन अर्नब जी सिर्फ़ बैन करने की बात करते हैं. जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर और ऐसे कई मुद्दों पर अर्नब गोस्वामी की किरकिरी हो चुकी है लेकिन बाज़ नहीं आते हैं. अभी ढाका में आतंकी हमला हुआ तो उसमें आतंकवादी किसी तरह ज़ाकिर नाइक को पसंद करते थे तो कहते हैं ज़ाकिर नाइक को बैन करो, चलो ठीक है इनकी ख्वाहिश है तो इनको ट्रेंड चला लेने दो लेकिन इनसे कोई कहो कि श्रद्धा कपूर को भी पसंद करता था एक आतंकी और मेनचेस्टर यूनाइटेड को भी, इनको भी बैन करवाने की बात होनी चाहिए. वैसे टाइम्स ग्रुप बहुत चौकस है अजीब ओ ग़रीब बैन की बात करता है, एक बार तो ये सरकार के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे थे जिसमें सरकार ने कहा था कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को शराब ना खरीदने दी जाए. कह रहे थे ये लोकतान्त्रिक अधिकार है.
वैसे ये टाइम्स ग्रुप कई लोगों से अजीब ओ ग़रीब क़िस्म के पंगे तो लेता ही है लेकिन औरतों के बारे में इनका दृष्टिकोण चर्चा का विषय रहा है, दीपिका पादुकोण ने इनको क्या कुछ नहीं कहा. पहले दीपिका का क्लीवेज दिखाने की कोशिश की बाद में तो कुछ ऐसा लिख दिया कि क्या ही कहें..दीपिका पादुकोण ने कहा था कि रणवीर पे उनको इतना भरोसा है कि वो उनके सामने खुल के अपने जज़्बात रख सकती हैं लेकिन इस बात को थोडा सा घुमा कर बॉम्बे टाइम्स ने हैडलाइन बनायी कि “मुझे रणवीर पे इतना भरोसा है कि उनके सामने नंगी हो सकती हूँ”.मैं ऐसी ज़बान आम ज़िन्दगी में इस्तेमाल नहीं करता लेकिन किस क़दर ज़लील हैं लोग. बॉम्बे टाइम्स को इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग के लिए बैन कर दिया जाना चाहिए.
सिर्फ़ दीपिका ही नहीं ऐसे और भी मुआमले हैं इस ग्रुप के नाम. महिला शशक्तिकरण की बात करने वाला ये ग्रुप अपनी फोटो गैल्लारी के लिए भी ख़ासा मशहूर है. इनकी वेबसाइट पर आप वो सब देख सकते हैं जो भारत का सेंसर बोर्ड आपको देखने से मना कर रहा है. आजकल इनके यहाँ “supermodels in bikini” टाइप कुछ चल रहा है, इसमें जिस तरह के फोटो हैं वो क्यूँ हैं? सिर्फ़ इसलिए कि जो लोग पोर्न साइट्स पर जाते हैं टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर आकर रुक जाएँ. कोई भाई-बहन समझाओ मुझे, क्या ये ख़बर है? इसके अलावा बोल्ड एक्ट्स इन बॉलीवुड और ऐसे तमाम बॉक्सेस मिलेंगे जिनका ताल्लुक न्यूज़ से कम आदमियों की वासना और कुंठा जगाने के लिए है. इनका सिटी पेज भी ख़बर नहीं सिर्फ़ उत्तेजक फोटो से भरा पडा रहता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया माँ-बाप और बच्चे साथ में नहीं पढ़ सकते, कम अज़ कम लखनऊ टाइम्स या बॉम्बे टाइम्स का आख़िरी पन्ना.
जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर टाइम्स नाउ और ख़ास तौर से अर्नब गोस्वामी ने जो रवैय्या दिखाया वो कई बड़े बड़े समझदार लोगों ने निंदनीय बताया लेकिन हट में थे साहब. अर्नब का बस चलता तो कन्हैय्या और उमर ख़ालिद फांसी पे लटक ही गए होते. शुक्र है कि देश में क़ानून है और अर्नब गोस्वामी जैसे जज नहीं हैं.
इधर सुनने में आया है कि अर्नब गोस्वामी के भारतीय जनता पार्टी से गहरे सम्बन्ध हैं खैर वो हों भी लेकिन पत्रकारिता भी कोई चीज़ है. उसका तो ख्याल करिए साहब. आप क्यूँ अपने को जज समझ बैठे हैं. अर्नब जी से बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि टाइम्स ग्रुप की साख अब जो भी रही सही है उसको संभालिये वरना अभी अलेक्सा में रैंकिंग 5552 है कहीं 50552 ना पहुँच जाए. आपको तो जेएनयू के मुद्दे से ही समझना चाहिए था कि अब आपको अपने को जज समझना बंद करना चाहिए लेकिन आप ना जाने कौन सी मिटटी के बने हैं, जो बात कुछ मिनट में समझने की है आपको अब तक समझ नहीं आ रही. आपको कोई ख़बर मिले तो उस पर बहस कराओ, पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों पक्ष ले लो उसके बाद ख़त्म कर दो बहस. बाक़ी फ़ैसला अदालत करेगी ना आप काहे इतना बौखलाए रहते हो?
आपकी और आपके ग्रुप की भलाई के लिए कह रहा हूँ कि टाइम्स ग्रुप को और बेकार होने से बचा लीजिये. किसी भले इंसान पर बिना वजह इलज़ाम मत लगाइए, अदालतों को फ़ैसला करने दीजिये इन बातों का और अगर ऐसा जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं कि जो आज फेसबुक पे कुछ लोग कहते हैं वो सब कहेंगे #BanArnab #BanTimesNow

(अरग़वान रब्बही)

लेखक के विचार निजी हैं

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