Friday , December 15 2017

क्रिकेट फनी भी है और क्रूएल भी ….दो नो बॉल ने बना दी इंडीज़ की किस्मत

तसनीम हैदर

क्रिकेट दिलचस्प खेल है और कुछ हद तक निर्दयी व जालिम भी … क्रिकेट पंडितों और खेल प्रेमियों के मुंह से ये बात अक्सर सुनी जाती है … ये महज कहावत है या वाकई मैदान पर मौजूद खिलाड़ी और स्टेडियम और टीवी सेट के सामने बैठे करोड़ो क्रिकेट प्रेमी इस कहावत की आत्मा को महसूस भी करते हैं ? आईसीसी टी-20 विश्व कप 2016 के दूसरे सेमीफाइनल को देखकर तो यही लगा कि ये कहवात हकीकत से ज्यादा दूर नहीं है … गुरुवार शाम मुंबई के वांखेड़े स्टेडियम में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल की दिलचस्पी मैच के निर्धारित समय से आधा घंटा पहले शुरु होने से हुई और जिसका समापन कोहली की गेंद पर आंद्रे रसेल के लगाए छक्के से .. इसे आप चाहें तो क्रिकेट का निर्दयी रुप कह सकते हैं ..

वांखेड़े पर टीम इडिया का रिकॉर्ड भले ही टीम इंडिया के पक्ष में नहीं रहा हो, लेकिन धोनी एंड कम्पनी की मौजूदा फॉर्म ने भारतीय टीम को सेमीफाइनल का संभावित विजेता पहले ही बना दिया था .. ये वही मैदान है जहां 1986 वन डे विश्व कप के सेमीफाइनल में कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय टीम इंग्लैंड से मात खा चुकी थी.. तीन साल बाद इसी मैदान पर नेहरु कप के सेमीफाइनल में भी भारतीय टीम यहां पराजित हुई थी ..27 वर्षों बाद महान कपिल व गावस्कर के बाद की तीसरी पीढ़ी, उसी मैदान पर एक बार फिर सेमीफाइनल की बाधा पार करने का लक्ष्य लेकर उतरी ..टूर्नामेंट में पहली बार रोहित और रहाणे की सलामी जोड़ी ने टीम इंडिया को आक्रामक शुरुआत दी … पावर प्ले में ही ओपनर्स टीम का स्कोर पचास के पार पहुंचा चुके थे …

क्रिकेट को फनी गेम क्यों कहा जाता है, इसका पहला नजारा देखने को मिला जब इन फार्म विराट कोहली विकेट पर आए … इसे कोहली और टीम इंडिया को खुशकिस्मती कहें या इंडीज को बदकिस्मती कि लगातार दो गेंदों पर कोहली आउट होते होते बचे … नौवें ओवर की तीसरी गेंद पर जो कि फ्री-हिट थी, पहले रामदीन ने फिर ब्रेवो ने रन आउट का मौका गंवाया .. अगली ही गेंद पर कोहली फिर रन आउट होने से बच गए … इस बार रामदीन फील्डर के थ्रो को ठीक तरीके से कलेक्ट नहीं कर पाए …वेस्टइडीज़ को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा … जबरदस्त फार्म में चल रहे क्रिकेट के सबसे छोटे स्वरुप के इस नंबर वन बल्लेबाज़ ने इसके बाद इंडीज़ के गेंदबाजों को सेट होने का मौका ही नहीं दिया ..टूर्नामेट में तीसरा अर्द्धशतक पूरा करने के बाद जब उन्हे दूसरे छोर पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का साथ मिला तो मानो रनों की बारिश होने लगी .. आस्ट्रेलिया के विरुद्ध अपनी रनिंग से कंगारुओं को तिगनी का नाच नचाने वाले कोहली और धोनी ने कैरिबियाई फील्डरों को भी मैदान में दौड़ा कर रख दिया ..

भारतीय पारी की जब आखरी गेंद फेंकी गई तब तक टीम इंडिया स्कोरबोर्ड पर 192 रन जोड़ चुकी थी .. सेमीफाइनल मुकाबले में घरेलू दर्शकों के सामने इस लक्ष्य को आसान नहीं कहा जा सकता … इस टार्गेट को सिर्फ क्रिस गेल ही छोटा साबित कर सकते थे, लेकिन दूसरे ओवर की पहली ही गेंद पर बूमराह ने जब उनका ऑफ स्टंप उड़ा दिया तो लक्ष्य पहाड़ सा दिखने लगा .. 2010 के टी- ट्वेंटी विश्व कप फाइनल में मार्वन सैमूअल ने एतिहासिक पारी खेल कर इंडीज़ को 31 साल बाद विश्व चैम्पिनय बनवाया था, लेकिन अगले ही ओवर में नेहरा ने उन्हे स्लोअर के जाल में फांस लिया … जीत बिल्कुल करीब दिखाई देने लगी .. इसके बाद रन तो बनते रहे, लेकिन मैच बराबर भारतीय टीम की पकड़ में रहा … सातवें ओवर में जब प्वाइंट पर बूमराह ने डाइव मारते हुए सिमंस का कैच पकड़ा तो मानो जीत भारत की झोली में आ गिरी हो ..लेकिन ये क्या आफ स्पिनर अश्विन का बांया पांव क्रीज़ के बाहर…सिमंस को मिला जीवनदान और फ्री हिट …

इस मैच में अभी और फनी मूवमेंट आने बाकी थे … तीन दिन पहले तक आईपीएल की तैयारी कर रहे लेंडल सिमंस मैच से एक दिन पहले ही मुंबई आए थे .. फ्लेचर के घायल होने की वजह से उन्हे अचानक वेस्टइंडीज़ से भारत बुलाया गया था .. उन्हे मौका भी मिला तो अपनी फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियंस के घरेलू मैदान पर जिस से वो भलि भांति परिचित थे … पिछले आईपीएल फाइनल में भी उन्हे इसी तरह अचानक फिंच के घायल होने के कारण मौका मिला था, और उन्होने शतक जमा कर मुंबई इडियंस को विजेता बनवा दिया …सेमीफाइनल में भी वो इसी मूड में थे.. इसी बीच पंद्रहवें ओवर में हार्दिक पांड्या की फुल टास गेंद पर सिमंस फिर कैच आउट हुए, लेकिन इस बार भी किस्मत उन पर मेहरबान रही… सिंमंस ना सिर्फ आउट होने से बचे, बल्कि फ्री-हिट पर तगड़ा छक्का भी जड़ दिया .. सिमंस का इस तरह रन बनाना टीम इंडिया के लिए चिंता की बात थी .. दो ओवर बाद मिड विकेट बाउंड्री पर वो तीसरी बार कैच किये गए , लेकिन इस बार कोहली का पैर बाउंड्री रोब से टच हो गया .. विकेट पर तब तक आंद्रे रसेल आ चुके थे .. आईपीएल के कारण दोनों बल्लेबाजों को भारतीय विकेटों का पूरा अंदाज़ा था, जिसका उन्होने पूरा फायदा उठाया .. अंतिम ओवर की चौथी गेंद पर रसेल ने छक्का लगा कर वो कारनामा अंजाम दे दिया जिसका मैच शुरु होने से पहले किसी ने अनुमान तक नहीं लगाया था …

जानते हैं इंडीज पारी का ये अंतिम ओवर किस भारतीय गेंदबाज़ ने फेंका ? विराट कोहली ने .. जी हां कोहली ने .. बावजूद इसके कि टीम के नंबर वन गेंदबाज़ अश्विन के कोटे का दो ओवर बाकी था, लेकिन ना तो धोनी ने चांस लेना उचित समझा और ना ही अश्विन ने इसकी हिम्मत दिखाई .. क्या कहेंगे आप ? है ना ये वाकई निर्दयी क्रिकेट .., लेकिन क्रिकेट का सफर और इसका संसार एक मैच के परिणाम से खत्म नहीं होता .. एक नया मैच, नया टूर्नामेंट , पिछली निराशाओं को भूलाकर आने वाले मैच में बेहतर परिणाम का सपना लिये हुए क्रिकेट प्रेमियों को फिर उसी उत्साह से स्टेडियम और अपने टीवी सेट का रुख करवा देता है, जिसका वो विगत तीन दशकों से निरंतर मुजाहरा करते चले आ रहे हैं …

(लेखक खेल पत्रकार हैं )

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