Thursday , December 14 2017

क्लार्क की क़ाइदाना सलाहियतों पर शुरू में यक़ीन नहीं था

साबिक़ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिक्की पॉन्टिंग को अपने जानशीन माईकल क्लार्क की क़ाइदाना सलाहियतों पर शकूक-ओ-शुबहात थे। पॉन्टिंग ने 2011 में नौ साल तक ऑस्ट्रेलियाई टीम की क़ियादत करने के बाद इस ज़िम्मेदारी को ख़ैरबाद कहा था।

साबिक़ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिक्की पॉन्टिंग को अपने जानशीन माईकल क्लार्क की क़ाइदाना सलाहियतों पर शकूक-ओ-शुबहात थे। पॉन्टिंग ने 2011 में नौ साल तक ऑस्ट्रेलियाई टीम की क़ियादत करने के बाद इस ज़िम्मेदारी को ख़ैरबाद कहा था।

उन्होंने कहा कि माईकल क्लार्क की क़ाइदाना सलाहियतों पर शकूक की वजह से ही उन्होंने अपनी सबकदोशी में ताख़ीर की थी। पॉन्टिंग ने अपनी ख़ुद नविश्त सवानिह हयात At The Close OF Play में तहरीर किया है कि ऐसा नहीं था कि माईकल क्लार्क किसी मनफ़ी रवैया का इज़हार करते थे और सरे आम अच्छी बातें करते थे।

पॉन्टिंग की इस किताब के इक़तिबासात अख़बार हेराल्ड सन में सिलसिला वार शाय किए जा रहे हैं। पॉन्टिंग ने कहा कि माईकल क्लार्क ऐसे खिलाड़ी नहीं थे जो किसी दिन खेल के खत्म‌ पर आइन्दा की मंसूबा बंदी के सेशन में ज़्यादा शिरकत करते थे और कप्तान के बोझ में कमी करने रज़ाकाराना तौर पर आगे आते थे।

पॉन्टिंग ने कहा कि उन्होंने और कोच टिम निल्सन ने एक से ज़ाइद मर्तबा उनकी हौसलाअफ़्ज़ाई की थी कि वो टीम में क़ाइदाना ज़िम्मा दारियों का बोझ सँभालने की कोशिश करें लेकिन जब उनका मूड नहीं होता और क्रिकेट के इलावा किसी और शोबा में उन्हें कोई मसला दरपेश होता तो वो अपने ख़ौल में बंद होजाते।

पॉन्टिंग ने तहरीर किया है कि में जानता हूँ कि वो खेल के ताल्लुक़ से नई नई सोच इख़तियार करते हैं लेकिन एक तवील अर्सा तक मुझे ये फ़िक्र लाहक़ थी कि बहैसियत ऑस्ट्रेलियाई कप्तान जो छोटी छोटी बातें पेश आती हैं शायद वो उससे निमटने के अहल ना हों। ये एहसासात उस वक़्त मज़ीद शदीद होते गए जब क्लार्क ने मैदान के बाहर सलेबरेटी अस्टाएल की ज़िंदगी गुज़ारनी शुरू की और वो टीम से ज़्यादा से ज़्यादा दूर होते गए।

पॉन्टिंग ने ताहम ये याद दहानी करवाई कि क्लार्क बहुत ज़्यादा ट्रेनिंग करते हैं और वो ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलना पसंद करते हैं। वो हमेशा अच्छी कारकर्दगी दिखाना चाहते हैं। ताहम क्रिकेट से दूर उनका तर्ज़-ए-ज़िदंगी टीम से बिल्कुल मुख़्तलिफ़ था। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर तशवीश नहीं थी कि कोई ड्रेसिंग रुम में दूसरों के साथ खाने पीने से गुरेज़ करता है लेकिन इस बात पर तशवीश ज़रूर थी कि कोई अपने साथी खिलाड़ियों से बात चीत का भी हिस्सा बनना नहीं चाहता और हँसने बोलने से गुरेज़ करता है।

उन्होंने कहा कि किसी दिन खेल के ख़त्म के बाद साथ मिल बैठ कर खेल का तजज़िया करना जो खिलाड़ी फ़ार्म में नहीं हैं उनकी हौसलाअफ़्ज़ाई करना और जो अच्छा खेल रहे हैं उनकी तारीफ‌ करना एक हौसलाअफ़्ज़ा अमल है। ताहम माईकल क्लार्क दो साल तक ऐसा करने से गुरेज़ करते रहे और टीम ने इस बात को नोट किया था।

पॉन्टिंग ने ये वाज़िह किया कि कप्तान बनने के बाद पॉन्टिंग के रवैया में तबदीली आई है और उन्होंने अपने साथियों को करीब करना शुरू करदिया था। कप्तान बनने के बाद उनकी बैटिंग में भी बेहतरी आई और क़ाइदाना दौर का कामयाब शुरुआत‌ हुआ था जब टीम ने बंगलादेश और श्रीलंका के ख़िलाफ़ कामयाबियां हासिल की थीं।

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