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क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए जूझते सऊदी-ईरान, मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए एक बड़े संकट की आहट

सऊदी अरब और ईरान कई वर्षों से क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए एक दूसरे से जूझ रहे हैं। लंबे वक़्त से ये देश एक-दूसरे के दुश्मन भी रहे हैं, लेकिन हाल ही में इन दोनों देशों के बीच तनातनी ज़्यादा बढ़ने लगी है. मध्य पूर्व का क्षेत्र एक बड़े संकट की तरफ कदम बढ़ाने लगा है. जानकार इस क्षेत्र को आने वाले वक्त में एक ख़तरनाक दौर से गुजरता हुआ देख रहे हैं.

कथित इस्लामिक स्टेट के धीरे-धीरे समाप्ति की राह पकड़ने के बाद, अब सऊदी अरब और ईरान एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और यही संकट पूरे मध्यपूर्व क्षेत्र को घेरने के लिए तैयार दिख रहा है. सऊदी और ईरान के बीच संघर्ष में लेबनान केंद्र बिंदु बना हुआ है.

यहां के प्रधानमंत्री साद हरीरी ने कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब दौरे के बीच में अप्रत्याशित रूप से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनके इस्तीफ़े का असर पूरे क्षेत्र में दिखाई पड़ रहा है. लेबनान के अधिकतर नागरिकों का मानना है कि हरीरी ने सऊदी के दबाव में आकर इस्तीफ़ा दिया है. इस पूरे घटनाक्रम को सुन्नी नेतृत्व वाले सऊदी अरब और शिया प्रभुत्व वाले ईरान के बीच जारी संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है.

सऊदी अरब को डर है कि ईरान मध्य-पूर्व पर हावी होना चाहता है और इसीलिए वह शिया नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी और प्रभाव वाले क्षेत्र की शक्ति का विरोध करता है.

युवा और शक्तिशाली क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पड़ोसी यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं. सऊदी का कहना है कि विद्रोहियों को ईरान से समर्थन मिल रहा है लेकिन तेहरान ने इस दावे को खारिज़ किया है.

सऊदी अरब भी उसके जवाब में विरोध करता है और सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-अशद को हटाना चाहता है, जो ईरान के मुख्य सहयोगी हैं.ईरान का मानना है कि सऊदी अरब लेबनान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है, यहां ईरान एक शिया अभियान हिज़बुल्लाह का समर्थन कर रहा है.

ताक़तवर हिज़्बुल्ला शिया आंदोलन को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जोकि लेबनान और इस इलाक़े में तनाव बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को ज़िम्मेदार ठहराता रहा है. लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री और हरीरी के पिता रफीक अल-हरीरी की हत्या 2005 में एक कार बम धमाके में हुई थी, इस धमाके के लिए हिज़्बुल्ला को ही ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

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