Friday , December 15 2017

खज़ाने की तलाश, सुप्रीम कोर्ट का मुदाख़िलत से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने आज महकमा आसारे-ए-क़दीमा (ASI) की जानिब से यू पी के ज़िला अनाव‌ में उन्नीसवीं सदी के एक क़िला में मदफ़ून ख़ज़ाना की तलाश के अमल में किसी भी मुदाख़िलत से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने आज महकमा आसारे-ए-क़दीमा (ASI) की जानिब से यू पी के ज़िला अनाव‌ में उन्नीसवीं सदी के एक क़िला में मदफ़ून ख़ज़ाना की तलाश के अमल में किसी भी मुदाख़िलत से इनकार कर दिया।

चीफ़ जस्टिस पी सथासीवम और जस्टिस रंजन गोगोई पर मुश्तमिल एक बेंच ने मफ़ाद-ए-आम्मा की एक दर्ख़ास्त पर समाअत को ज़ेर-ए-इलतिवा रखा है क्योंकि दर्ख़ास्त गुज़ार ने ख़ाहिश की थी कि खुदवाई के ज़रिया ख़ज़ाना की तलाश को अदालत की निगरानी में अमल में लाया जाये और साथ ही साथ ये ख़ाहिश भी की थी कि उसकी दर्ख़ास्त को रद‌ या ख़ारिज ना किया जाये।

बेंच ने इस्तिदलाल पेश किया कि अदालत किसी भी सनसनीखेज़ मुआमले में मुदाख़िलत नहीं करसकती। अगर ऐसा करना ही है तो इस केलिए कोई ठोस बुनियाद होनी चाहिए महज़ तसव्वुराती बुनियादों पर अदालत हुक्म जारी नहीं करसकती।

याद रहे कि मफ़ाद-ए-आम्मा की दर्ख़ास्त ऐडवोकेट एम एल शर्मा ने दाख़िल की है जिस में उन्होंने अदालत से ख़ाहिश की थी कि खुदवाई के मुक़ाम पर निगरानी के मुनासिब इंतिज़ामात किए जाएं क्योंकि अगर वहां कोई मदफ़ून ख़ज़ाना है तो वो ग़लत हाथों में नहीं जाना चाहिए जिस पर बेंच ने कहा कि फ़िलहाल मौजूदा सूरत-ए-हाल में अदालत की जानिब से किसी भी हुक्म को जारी करने की ज़रूरत नहीं है।

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