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खजूर से इफ्तार करने से होता है बेहद फायदा, जानिए, इसकी अहमियत

रमजान का मुकद्दस महीना शुक्रवार 18 मई से शुरु हो रहा है। इस महीने में दुनियाभर के मुस्लिम पूरे महीने रोजे रखते हैं। इस दौरान मुसलमान खजूर का सेवन विशेष रूप से करते हैं। खासतौर पर रोजा इफ्तार में खजूर का इस्तेमाल जरूर करते हैं। दरअसल, हदीस में खजूर से रोजा इफ्तार करने बात आई है।

इफ्तार करने का सुन्नत (पैगंबर मोहम्मद जो भी काम करते थे, उन्हें सुन्नत करार दिया गया है।) के मुताबिक तरीका ये है कि रूतब (पके हुए ताज़ा खजूर) से रोज़ा इफ्तार किया जाए। अगर खजूर न मिले तो सूखे खजूर (छोहारा) से और अगर वह भी न हो तो पानी से इफ्तार करना चाहिए, क्योंकि अनस रज़ियल्लाहु अन्हु की हदीस है।‘‘अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ पढ़ने से पहले कुछ रूतब पर इफ्तार करते थे, यदि वह न होती थीं तो चंद खजूरों पर, यदि वह भी उपलब्ध ने होती तो चंद घूंट पानी पी लेते थे।’’

इसे अबू दाऊद (हदीस संख्या : 2356), तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 696) में भी रिवायत किया है और अल्बानी ने इर्वाउल-गलील (4/45) में इसे हसन कहा है। आधुनिक न्यूट्रीशनिस्ट भी यही कहते है कि जो बातें धार्मिक किताबों में लिखी होती हैं, उनकी कुछ वजह होती हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं रोजा खजूर से खोलने से सवाब मिलता है, लेकिन सवाब मिलने के साथ-साथ ये आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद है,क्योंकि खजूर में नेचुरल शुगर होती है, जिससे रोजा रखने के दौरान कम हुआ शुगर लेवल बैलेंस हो जाता है।

दरअसल, लंबे समय तक भूखा रहने के बाद अचानक ज्यादा भोजन करने से शरीर को नुकसान होता है। ऐसे में रोजा खोलते वक्त कुछ ऐसा खाना खाना चाहिए जो थाड़ा खाने से भी शरीर को भरपूर ताकत पहुंचा सके और खजूर बखूबी इस काम को करता है।

ऐसे में इफ्तार के वक्त खजूर खाने से शरीर को काफी शक्ति मिल जाती है, जिससे भूख कम लगती है और कोई परेशानी भी नहीं होती। इसके अलावा खजूर खाने से पाचन तंत्र भी मजबूत रहता है, क्योंकि इसमें काफी मात्रा में फायबर पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है।

सारा दिन भूखे और प्यासे रहने की वजह से शरीर में कमजोरी आ जाती है, ऐसे में खजूर खाने से शरीर को इतनी ताकत आसानी से मिलती है, जितना कि बहुत ज्यादा भोजन करने प्राप्त किया जा सकता है। नोएडा सेक्टर 168 स्थित छपरौली की मस्जिद नूर के इमाम व खतीब मौलाना ज्याउद्दीन ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने फ़रमाया था कि जब कोई रोज़ा इफ्तार करें तो खजूर या छोहारा से इफ्तार करें, क्योंकि इस में बरकत है और अगर खजूर या छुहारा नहीं मिले तो पानी से इफ्तार करें, क्योंकि पानी पाक करने वाला है।

खजूर में ग्लूकोज, सुक्रोज और फ्रुक्टोज पाए जाते हैं, जिसकी वजह से खजूर के सेवन से शरीर को तुरंत ताकत मिलती है। खजूर का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है, जिससे दिल की बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा खजूर में भारी मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है।

इसके अलावा इसमें सोडियम की मात्रा कम होती है,जोकि नर्वस सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद होता है। खजूर में आयरन पाया जाता है, जो खून से संबंधित बीमारियों से छुटकारा दिलाता है। खजूर के बारे में मुहम्मद साहब ने भी कहा था कि इसमें बरकत है।

इस्लाम में यकीन नहीं रखने वालों की खजूर को लेकर ये थी राय
ताजा रिसर्च से सामने आए खजूर के फायदे ने साबित कर दिया है सुन्नत का तरीका पूरी तरह विज्ञान आधारित है। जबकि, इससे पहले रमजान में खजूर खाने के रिवाज पर इस्लाम में यकीन नहीं रखने वाले विद्वान ये तर्क देते थे कि इस्लाम अरब से शुरू हुआ था।

वहां पर खजूर आसानी से उपलब्ध फल था। ऐसे में रोजे में खजूर का इस्तेमाल शुरु किया गया। अरब में खजूर की ज्यादा पैदावार होती थी। लिहाजा, यह हर एक के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाता था। इसी लिए रोजे में खजूर के सेवन करने की परंपरा शुरू हुई।

साभार- ‘पत्रिका’

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