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ख़वातीन का हिजाब: सूडान में इख़तिलाफ़ राय

ख़ुरतूम। 22 जनवरी (यू एन आई)सूडान में ख़वातीन के हिजाब से मुताल्लिक़ एक फ़तवे के बाद मलिक के मज़हबी हलक़ों की जानिब से शदीद रद्द-ए-अमल सामने ए या है। मज़हबी सयासी जमात उम्मा पार्टी के सरबराह अल्लामा सादिक़ अलमहदी ने मुबय्यना तौर प

ख़ुरतूम। 22 जनवरी (यू एन आई)सूडान में ख़वातीन के हिजाब से मुताल्लिक़ एक फ़तवे के बाद मलिक के मज़हबी हलक़ों की जानिब से शदीद रद्द-ए-अमल सामने ए या है। मज़हबी सयासी जमात उम्मा पार्टी के सरबराह अल्लामा सादिक़ अलमहदी ने मुबय्यना तौर पर ये कह दिया है कि क़ुरान में ख़वातीन के हिजाब का कोई तज़किरा नहीं।

सलफ़ी मसलक की जमात अलराबता अलशरईह ने जहां सादिक़ अलमहदी के फ़तवे को तकफ़ीरी क़रार देते हुए उन से तौबा का मुतालिबा किया है वहीं सादिक़ अलमहदी का कहना है कि इस्लाम ख़वातीन के लिए किसी मख़सूस पर्दे और लिबास का हुक्म नहीं देता। इस्लाम सिर्फ एक बावक़ार लिबास की तलक़ीन करता है।

सक़ाफ़्ती हलक़ों और समाजी तंज़ीमों ने बहर हाल दोनों मसालिक के उल्मा के अंदाज़ ब्यान को नाक़ाबिल-ए-क़बूल क़रार दिया है।मोतदिल मज़हबी हलक़ों और समाजी तंज़ीमों की जानिब से तकफ़ीरी फतावा की मुज़म्मत करते हुए कहा गया है कि इस तरह के फ़तवे मज़हबी शिद्दत पसंदी और इश्तिआल अंगेज़ी का बाइस बन सकते हैं।

सूडान में सलफ़ी मसलक के एक पैरोकार और सरकरदा आलिम दीन उल-शेख़ मुहम्मद अबदुलकरीम ने उलार बया से गुफ़्तगु करते हुए कहा कि असल मसला सलफ़ी मसलक नहीं बल्कि दीगर समाजी और मज़हबी हलक़े हैं जो मुवाफ़िक़ाना और मुख़ालिफ़ाना फ़तवे सादर करते रहे हैं।

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