ख़ानक़ाह कामिल मैं नाअतिया मुशायरा का इनइक़ाद

ख़ानक़ाह कामिल मैं नाअतिया मुशायरा का इनइक़ाद
हैदराबाद २३ फरवरी(रास्त) बज़मन जश्न मीलाद-उन्नबी सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम ख़ानक़ाह-ए-कामिल दुबैर पूरा मैं नाअतिया मुशायरा ज़ेर-ए-निगरानी हज़रत सय्यद मुहम्मद क़बूल बादशाह कादरी अलशतारी अदीबऔ जांनशीन हज़रत कामलऒ मुनाक़िद हु

हैदराबाद २३ फरवरी(रास्त) बज़मन जश्न मीलाद-उन्नबी सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-सल्लम ख़ानक़ाह-ए-कामिल दुबैर पूरा मैं नाअतिया मुशायरा ज़ेर-ए-निगरानी हज़रत सय्यद मुहम्मद क़बूल बादशाह कादरी अलशतारी अदीबऔ जांनशीन हज़रत कामलऒ मुनाक़िद हुआ। क़ारीदाऊद क़लंदर की क़रणत कलाम पाक से आग़ाज़ हुआ।

जनाब सय्यद क़ादिर मुही उद्दीनजुनैद बादशाह कादरी ज़र्रीन कुलाह ने हज़रत कामलऒ का नाअतिया कलाम सुनाया। मौलाना सय्यद महमूद बादशाह कादरी मरीन कुलाह मोतमिद कामिल एकेडेमी ने अपने ख़ैरमक़दमी कलिमात में कहाकि ख़ानक़ाहों में नाअतिया मुशाविरों का इनइक़ाद एक मुस्तहसिन रिवायत ही। शहर हैदराबाद को ये शरफ़ हासिल है कि यहां हर दौर में इलम-ओ-फ़न की बाकमाल हस्तियां रहती हैं। उल्मा-ओ-मशाइख़ और शारा-ए-ओ- उदबा से ये शहर हमेशा जगमगाता रहा है।

इन में एक कद्दावर शख़्सियत हज़रत सय्यद शीख़न अहमद कादरी अलशतारी कामलऒ की भी थी कि जिन की नाअतिया-ओ-मिनक़बती शायरी अवाम-ओ-ख़वास हर दो में यकसाँ मक़बूलियत-ओ-पसंद के हवाला से ग़ैरमामूली हैसियत रखती है।

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