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ख़ुदारा! एक अल्लाह एक रसूल(स०)की उमत में दराड़ें ना डालें

हैदराबाद 27 मई: उत्तरप्रदेश में जहां मसलकी इख़तेलाफ़ात मुल्क के दुसरे इलाक़ों की निसबत कुछ ज़्यादा पाए जाते हैं वहां चुनाव से पहले एसा माहौल तैयार किया जा रहा है कि अगर मुस्लमान बिहार की तरह मुस्लिम सियासतदानों के चंगुल से बच जाये तो मसलक के जाल में ज़रूर फंस जाये।बीजेपी इन हथियारों के साथ ज़राए इबलाग़ के हथियार को भी इस्तेमाल कर रही है और उतर प्रदेश में बिहार के तर्ज़ पर अज़ीम इत्तेहाद को बनने से रोकने के लिए बहुजन समाज को मुकम्मिल अक्सरीयत की पेश क़यासी करवाई जा रही है ताकि बहुजन समाज-ओ-दुसरे सेक्युलर जमातों का इत्तेहाद ना होने पाए और मुस्लिम वोट मसलक-ओ-सियासत की नज़र होजाएं।

महाराष्ट्रा आसाम और बिहार के तजुर्बात को यकजा करते हुए फ़िर्कापरस्त तक़तें उतर प्रदेश की हिक्मत-ए-अमली तैयार कर रही हैं ।मुस्लमान अगर कलिमे की बुनियाद पर मुत्तहिद होते हैं तो उन नापाक अज़ाइम को कामयाब होने से रोका जा सकता है।मुल्क में मुसलमानों का शीराज़ा बिखेरने के लिए की जा रही साज़िशों का शिकार बनने वालों को हासिल सियासी सरपरस्ती उन के लिए ढाल बनी हुई है जबकि उम्मत के तमाम गोशों में इन अनासिर के ख़िलाफ़ नफ़रत की लेहर पाई जाती है जो फ़िर्कापरस्तों की साज़िशों का शिकार बनते हुए उम्मत में रख़्ना अंदाज़ी के दोषी बन रहे हैं।

मुसलमानों को मसलक की बुनियादों पर तक़सीम करते हुए उन्हें ख़ानों में बांटने की कोशिश करने वालों के आला कार बनने वालों में एसे अनासिर भी शामिल हैं जो बीजेपी की दरपर्दा सियासी हलीफ़ खुले आम बहुत अच्छे ताल्लुक़ात रखते हैं बल्के उनके हक़ में राए दहिंदों से अपील भी करते हैं। हिंदुस्तान में मुसलमानों के बीच मौजूद बाज़ मसाइल पर इख़तेलाफ़ात को हवा देने के लिए जो साज़िशें तैयार की गई हैं उन पर सूफ़ी कांफ्रेंस के नाम पर अमली जामा पहनाया गया और इस के लिए मुल्क की बेशतर रियासतों में मौजूद एक मख़सूस मकतब फ़िक्र से ताल्लुक़ रखने वालों को मोदी नवाज़ गिरोह के तौर पर पेश किया गया। रियासत तेलंगाना से जिन लोगों ने इस कांफ्रेंस में शिरकत की उनका हमेशा ही सियासी ताल्लुक़ एक मख़सूस सियासी जमात से रहा जोकि फ़िलहाल मशकूक नज़र आती है। मुक़ामी सियासी जमात के हक़ में वोट की अपील करने और उनके इदारों से वाबस्ता लोगों की सूफ़ी कांफ्रेंस में शिरकत के बावजूद जमात से ताल्लुक़ात की बरक़रारी इस बात का सबूत है कि जिन लोगों ने इस कांफ्रेंस में शिरकत की वो भी दरअसल हिदायत के हुसूल के बाद ही गए थे।

मुल्क भर में इस कांफ्रेंस को मिल्लत-ए-इस्लामीया में दराड़ पैदा करने की कोशिश के तौर पर देखा गया
लेकिन इन कोशिशों को नाकाम बनाने के लिए हज़रत मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान ने जो क़दम उठाया उस की हर उस गोशे की तरफ से सताइश की जा रही है जो मिली इत्तेहाद के लिए सरगर्दां है। इस के बरअकस बाज़ लोगों की तरफ से उनकी शिद्दत के साथ मुख़ालिफ़त करते हुए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है जिनमें बेशतर वही लोग हैं जो नरेंद्र मोदी के सूफ़ी दरस से मुतास्सिर हैं।

हज़रत मौलाना असअद मदनी के इंतेक़ाल के बाद जमीअतुल उलेमा के मुआमलात पर मौलाना अरशद मदनी और मौलाना महमूद असअद मदनी के बीच इख़तेलाफ़ात रौनुमा हो गए थे लेकिन मुल्क में मौजूदा साज़िशों के जाल के बीच उन लोगों ने अपने इख़तेलाफ़ात को फ़रामोश करते हुए मिल्लत में इत्तेहाद की कोशिशों को अमली जामा पहनाया। इन हालात में जहां भारतीय जनता पार्टी मुल्क में बसने वाले मुसलमानों में इख़तेलाफ़ात को प्रवान चढ़ाते हुए अपने मुफ़ादात हासिल करने में मसरूफ़ है वहीं मुस्लिम सियासी जमातें भी दरपर्दा इन कोशिशों को मुस्तहकम करने लगी हैं।

उतर प्रदेश असेंबली चुनाव में अमीत शाह अपने बग़ल बच्चों के सात कामयाबी हासिल करने के ख़ाब देख रहे हैं और उनके ख़ाबों की ताबीर सियासी-ओ-मज़हबी मुनाफ़िरत फैलाने वाली ताक़तें पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। उतर प्रदेश असेंबली चुनाव से पहले गाय का गोश्त या भारत माता की जय जैसे मौज़ूआत पर हंगामा-आराई नहीं होगी बल्के हिंदुस्तान के हस्सास तरीन मसला यानी बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर की तामीर के मसले पर हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद में रख़्ना डाला जाएगा और इस मसले को अदालती रस्सा-कशी के बावजूद अवाम के बीच मौज़ू बेहस वही लोग बनाएंगे जो अपने भाई की तक़रीर के मुताल्लिक़ सवाल को मुक़द्दमा ज़ेर दौरां होने का बहाना करते हुए टाल जाते हैं। मंदिर।मस्जिद मसलक मज़हबी मुनाफ़िरत की सियासत के ज़रीये बीजेपी उतर प्रदेश में इक़तिदार हासिल करने के लिए अपने तमाम हलीफ़ों को इस्तेमाल कर रही है।

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