Saturday , November 18 2017
Home / Jharkhand News / खातून को डॉक्टर ने एड‌्स का मरीज़ बता दिया, अहले खाना भागा अस्पताल से

खातून को डॉक्टर ने एड‌्स का मरीज़ बता दिया, अहले खाना भागा अस्पताल से

देवघर : जामताड़ा सदर अस्पताल के एक डॉक्टर ने बुखार से मुतासीर खातून लक्खी हांसदा का एचआइवी टेस्ट कराया और उसे एड्स मरीज बता दिया। जबकि टेस्ट रिपोर्ट में खातून को एचआइवी निगेटिव बताया गया था। डॉक्टर के इस कारनामे के बाद लक्खी हांसदा की देख-भाल कर रहे बेटा-बेटी समेत उसके अहले खाना उसे अस्पताल में छोड़ कर भाग गये।

अस्पताल की लापरवाही की हद तब हो गयी, जब लक्खी हांसदा को सात सितंबर को ठेले पर चढ़ा कर उसके गांव भेज दिया। गांव और समाज के लोगों ने भी उसकी खबर नहीं ली। उसे एड‌्स का मरीज मान कर समाज के लोगों ने उसका बायकोट कर दिया।

लक्खी तीन दिनों तक गांव के बाहर की पड़ी रही। देखभाग नहीं होने की वजह से लक्खी मरने की हालत में चली गयी। मामले का खुलासा तब हुआ, जब जामताड़ा एमएलए इरफान अंसारी ने गांव में जाकर उससे मुलाकात की आैर फिर अस्पताल में उसकी एचआइवी टेस्ट रिपोर्ट देखी।

उन्होंने डॉक्टर की इस लापरवाही से वजीरे आला रघुवर दास को जानकारी दिलाई. वजीरे आला ने मामले की जांच कर मुजरिम लोगों पर कार्रवाई का हुक्म दिया है। डॉक्टर की लापरवाही का खुलासा होने के बाद जुमा को लक्खी को फिर से अस्पताल में एड्मिट कराया गया है। लक्खी सदर ब्लॉक के शहरडाल गांव की रहनेवाली है।

इत्तिला मिलने के बाद एमएलए इरफान अंसारी अस्पताल गये। लक्खी का बीएचटी (बेड होल्ड टिकट) देखा। जब एमएलए ने एचआइवी टेस्ट रिपोर्ट देखा तो पाया कि उसमें तो एचआइवी निगेटिव है। इसके बाद उन्होंने कई डॉक्टरों के साथ चर्चा की। डॉक्टरों ने पूरी तरह से तहक़ीक़ात के बाद सहमत हुए कि लक्खी को एड्स नहीं है।

डॉक्टरों से मुतमइन होने के बाद एमएलए इरफान आठ सितंबर को लक्खी के गांव गये। गाँव वालों को पूरी जानकारी दी। फिर भी गांववाले मानने को तैयार नहीं थे। एमएलए ने मामले की जानकारी वजीरे आला रघुवर दास को दी। वजीरे आला की हिदायत पर एड्स कंट्रोल डॉ बीपी चौरसिया मामले की जांच को पहुंचे हैं। खातून को गांव से दुबारा सदर अस्पताल में एड्मिट कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।

इस मामले को लेकर वजीरे आला रघुवर दास से मिला। उन्हें सेहत महकमे के कारनामे से जानकारी कराया है। सेहत वज़ीर से इस्तीफे की मांग की है। हेल्थ डिपार्टमेंट की लापरवाही से खातून जीते जी मर रही है। इसलिए सरकार उसे ज़िंदगी गुज़र बसर के लिए नौकरी और 10 लाख रुपये मुआवजा दे। यह वाकिया रियासत के लिए शर्मशार करनेवाली है.
इरफान अंसारी, जामताड़ा

TOPPOPULARRECENT