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खादी और हैंडलूम प्रोडक्ट्स पर जीएसटी लगने से दांव पर हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी

उत्तर प्रदेश: भारत की आजादी से जुडी बापू की खादी और हैंडलूम भी अब जीएसटी के दायरे में आ गए हैं।

सरकार ने खादी के प्रोडक्ट्स पर 5 से 18% जीएसटी लगाया है। जिससे खादी प्रोडक्ट्स महंगे हो गए हैं।

यूपी के बागपत में हैंडलूम के गढ़ खेकड़ा कस्बे की कई खादी से जुड़ा सामान बनाने वाली इकाईयां सहम गई है। हजारों मजदूरों की रोजी पर भी खतरा मंडराने लगा है।

व्यापारियों के साथ बुनकरों को भी इस बात की चिंता हो रही है कि कहीं उनका धंधा घाटे में न चला जाए। क्यूंकि जीएसटी लगने के बाद साफ है कि खादी कपड़े महंगे होने से मांग घटेगी।

आपको बता दें की खादी का कपड़ा खरीदने पर पांच फीसद, एक हजार रुपये से ज्यादा कीमत वाले खादी के रेडीमेड परिधान पर 12 फीसद कर चुकाना होगा। खादी के पोलीवस्त्र खरीद पर 18 फीसद कर चुकाना होगा।

बुनकरों का कहना है कि हैंडलूम की मांग पहले ही कम थी। ऊपर से जीएसटी लगाकर सरकार ने हमारा धंधा भी चौपट करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। बुनकरों की रोजी रोटी बचाने को सरकार को खादी कपड़ा कर मुक्त करना चाहिए।

अंदाजा लगाया जा रहा है कि अगर सरकार खादी पर से जीएसटी नहीं खत्म करती तो व्यापारियों के साथ बीस हजार से ज्यादा श्रमिक भी प्रभावित हो सकते हैं।

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