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खुलासा : पशुपालन घोटाले की तर्ज पर झारखंड में धान घोटाला

रांची: पशुपालन घोटाले की तर्ज पर झारखंड में धान घोटाला हुआ है. चारा घोटाले में जैसे स्कूटरों से चारा व सांढ़ ढोये गये थे, वैसा ही कारनामा सहकारिता विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग के अफसर व लैंप्स-पैक्स प्रबंधकों ने कर डाला. इन लोगों ने भी किसानों से खरीदा धान राइस मिलों तक पहुंचाने के लिए मोपेड, मोटरसाइकिल, कार, टेंपो, जीप और बस का इस्तेमाल किया. इन वाहनों से करीब 25 हजार क्विंटल धान-चावल ढोये गये, जिनकी कीमत 3.29 करोड़ रुपये होती है.आठ जिलों में हुई एजी की जांच रिपोर्ट से मामले का खुलासा हुआ है.

इन्हीं वाहनों से एफसीआइ गोदाम तक चावल पहुंचाये गये : रांची, खूंटी, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो, गढ़वा, देवघर व दुमका की राइस मिलों से निकला लेवी चावल एफसीआइ के गोदामों तक पहुंचाने का काम भी मोटरसाइकिल, कार व मोपेड से हुआ है. इस काम में कुल 68 मोटरसाइकिल, दो मोपेड, आठ टेंपो, सात कार, दो जीप, एक जिप्सी, एक वैन तथा एक बस का इस्तेमाल किया गया. बस का इस्तेमाल सिर्फ खूंटी में हुआ है.

धनबाद के चैनपुर में एक ही मोटरसाइकिल (जेएच10वी-9422) से तीन हजार क्विंटल धान की ढुलाई हुई है. उसी तरह दुमका के मकरो व आसनसोल धान खरीद क्रय केंद्र ने एक मोटरसाइकिल (जेएच04सी-5641) का कुल 61 दिनों तक इस्तेमाल कर चार हजार क्विंटल धान की ढुलाई दिखायी है. हजारीबाग के मेरू में राइस मिल से एफसीआइ के गोदाम तक चावल पहुंचाने कि लिए ट्रैक्टर (जेएच13सी-1318) का इस्तेमाल ट्रैक्टर खरीदने से पहले (12.3.13 को) ही दिखा दिया गया है. इसी जिले के बेंगावारी धान क्रय केंद्र ने जिस जिप्सी (जेएचएए-4881) का इस्तेमाल दिखाया है, वह अाइजी के नाम से निबंधित है. इस जिप्सी से एक ही दिन (पांच जून 2012 को) दो सौ क्विंटल धान राइस मिल तक पहुंचाया गया है. खूंटी के डोरेया तथा देवघर के सिकटिया में तो स्कूटर व मोपेड (क्रमश: जेएच01वाइ-6144 तथा जेएच10एच-4933) से भी धान की ढुलाई हुई है. मोपेड पर 250-250 क्विंटल धान लादा गया है. वहीं इस घोटाले में शामिल रैकेट ने एक-एक मोटरसाइकिल से एक ही दिन में नौ से 360 क्विंटल तक धान राइस मिलों में पहुंचाने का कमाल किया है. जानकारों का मानना है कि उक्त आठ जिलों की ही तरह पूरे राज्य में यही खेल हुआ है. गड़बड़ी के ज्यादातर मामले वित्तीय वर्ष 2011-12 तथा 2012-13 से संबंधित हैं.

धनबाद के चैनपुर में एक ही मोटरसाइकिल (जेएच10वी-9422) से तीन हजार क्विंटल धान की ढुलाई हुई. दुमका के मकरो व आसनसोल धान खरीद क्रय केंद्र ने एक ही मोटरसाइकिल (जेएच04सी-5641) से चार हजार क्विंटल धान की ढुलाई केंद्र से चावल मिल तक दिखायी है

2011-15 तक 729.83 करोड़ का चावल एफसीआइ को. पर बिल 694.34 करोड़ का ही. वहीं भुगतान सिर्फ 655.12 करोड़ का (कुल 74.71 करोड़ फंसा है).
धान की सफाई व गुणवत्ता के लिए किसी जिले में पावर क्लिनर, मॉयश्चर (आद्रता) मीटर व एनालिसिस किट नहीं मिला. फरजी किसानों से खरीदा गया धान (चार जिलों के 20 खरीद केंद्रों में ही कुल 200 में से 112 मामले संदेहास्पद). हजारीबाग की जिन पांच राइस मिलों पर था 42 करोड़ बकाया, उन्हें फिर से धान दे दिया.

सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदती है. सहकारिता विभाग के लैंप्स-पैक्स के जरिये किसानों से धान खरीदे जाते हैं. यह धान मीलिंग के लिए चावल मिलों में भेजा जाता है. राइस मिल से चावल निकलने पर इसे एफसीआइ को भेजा जाता है. इसका बिल देने पर एफसीआइ सरकार को चावल की कीमत अदा करता है. इस तरह से किसानों से धान खरीद का यह रिवॉल्विंग फंड चलता रहता है. लैंप्स-पैक्स से मिलों को धान तथा मिलों से निकला चावल एफसीआइ तक भेजने का काम सरकार का है. इस परिवहन शुल्क के लिए लैंप्स-पैक्स को एडवांस दिये जाते हैं.

धान खरीद योजना में दो तरह से गड़बडी होती रही है. एक फरजी किसानों से धान खरीद. यानी जो किसान है ही नहीं या जो धान विक्रेता नहीं है, उनके धान की खरीद दिखाना. दूसरी गड़बड़ी धान की फरजी खरीद, यानी धान खरीदा ही नहीं जाना. पहले मामले में बाजार व पड़ोसी राज्यों से घटिया चावल मंगा कर एफसीआइ को दिया गया. अंतर मूल्य के रूप में करोड़ों रुपये पचा लिये गये. दूसरे मामले में धान खरीद के पैसे ही फंसा दिये गये. चार वर्षों से चावल मिलों तथा लैंप्स-पैक्स प्रबंधकों के पास सरकार के 90 करोड़ रुपये बकाया हैं.

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