Thursday , January 18 2018

खून की दलाली में पकड़ाया रिम्स मुलाज़मीन

रिम्स में एक और दलाल खून की दलाली करते पकड़ा गया। दलाल कोई और नहीं, बल्कि रिम्स का ही रोजाना तंख्वाह दार अफराद भोला है, जिसकी डयूटी सर्जरी वार्ड में रहती है। चार यूनिट खून के लिए उसने मरीज के खानदान से तीन हजार रुपये लिए थे। अब तक बाहर

रिम्स में एक और दलाल खून की दलाली करते पकड़ा गया। दलाल कोई और नहीं, बल्कि रिम्स का ही रोजाना तंख्वाह दार अफराद भोला है, जिसकी डयूटी सर्जरी वार्ड में रहती है। चार यूनिट खून के लिए उसने मरीज के खानदान से तीन हजार रुपये लिए थे। अब तक बाहरी दलाल की ही रिम्स में खून के सौदेबाजी में मौलूसीयत रहती थी। कुछ मामलों में रोजाना मुलाज़मीन की सरगर्मी दिखी है। दो मामलों में मुलाज़मीन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

मामला पेडियाट्रिक सर्जरी का है। तमाड़ के रहनेवाले राम सिंह मुंडा ने अपनी बेटी को पेट फूलने और दर्द की शिकायत पर रिम्स में भर्ती कराया था। मरीज के ऑपरेशन के लिए चार यूनिट ब्लड की जरूरत थी। इसे देखते हुए रिम्स के मुलाज़मीन भोलू ने अहले खाना से राब्ता किया और चार यूनिट ब्लड के लिए तीन हजार रुपये की मांग की। इसी दौरान जब भोलू ब्लड बैंक में जुमा को खून लेने पहुंचा तो ब्लड बैंक के डॉक्टर और मुलाज़मीन को खदशा हुआ और उसे इंचार्ज सुप्रीटेंडेंट डॉ. कुमारी वसुंधरा के पास ले गए। हालांकि भोलू किसी भी तरह का पैसा लेने से इन्कार करते दिखा।

अपने खून की हिफाजत के लिए खून के दलालों से मजबूरन खून का सौदा करना पड़ता है। यह हालात दारुल हुकूमत रांची की है। लेकिन दीगर जिलों की बात करें, तो हालात खराब है। कई जिलों में ब्लड बैंक की सहूलत नहीं है। जहां है, वहां आसानी से खून नहीं मिलता। आए दिन सड़क हादसे होती रहती हैं। ऐसे में किसी को खून की जरूरत पड़ जाए, तो सीधे रांची रेफर कर दिया जाता है। यहां पहुंचते-पहुंचते कइयों की सांस बीच रास्ते में ही रुक जाती है।

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