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ख्वातीन के हुकूक के मामले में पाकिस्तान से थोड़ा ही बेहतर है हिंदुस्तान

ख्वातीन के हुकूक के लिए काम करने वाले दो सौ से ज़्यादा माहिरीनो ने एक सर्वे के ज़रिए हिंदुस्तान को ख्वातीन के लिए गैर महफूज़ बताया है | इस सर्वे की मानें तो हिंदुस्तान में इंसानी तस्करी औऱ Female feticide के मामले सबसे ज्यादा हैं | इस मामले में

ख्वातीन के हुकूक के लिए काम करने वाले दो सौ से ज़्यादा माहिरीनो ने एक सर्वे के ज़रिए हिंदुस्तान को ख्वातीन के लिए गैर महफूज़ बताया है | इस सर्वे की मानें तो हिंदुस्तान में इंसानी तस्करी औऱ Female feticide के मामले सबसे ज्यादा हैं | इस मामले में हिंदुस्तान अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से थोड़ा बहुत ही बेहतर है, इस फहरिस्त में पाकिस्तान तीसरे मुकाम पर है |

अफगानिस्तान को तो ख्वातीन के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक मुल्क माना गया है | जम्हूरी मुल्क कांगो इस फहरिस्त में दूसरे मुकाम पर है और सोमालिया हिंदुस्तान के बाद पांचवे मुकाम पर है |

इस सर्वे में कुछ ऐसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए थे कि….

खराब सेहत की खिदमात की वजह से किस मुकाम पर ख्वातीन की सबसे ज्यादा मौत होती है |

कौन से मुकाम पर ख्वातीन सबसे ज्यादा जिस्मानी तशद्दुद झेलती हैं

रिवायती वजुहात की वजह से किस जगह ख्वातीन के साथ सबसे ज्यादा इम्तियाज़ी रवैया अपनाया जाता है |

इन सवालो के जबाव इतने खतरनाक मिले कि हिंदुस्तान को ख्वातीन की अदम तहफ्फुज़ के लिए चौथे मुकाम पर ला दिया, यह हालात गौर करने के काबिल है | हिंदुस्तान को इस सर्वे में इ‍ंसानी तस्करी, इम्तियाज़ी रवैय्ये और शकाफती मामलों के लिए आड़े हाथों लिया गया |

सर्वे के मुताबिक हिंदुस्तान में लड़कों को लड़कियों से ज्यादा तवज्जो दी जाती है, जिसकी वजह से मुल्क में Female feticide के मामले बढ़े हैं | हिंदुस्तान में आज भी नाबालिग बच्चो की शादी का रीती रिवाज़ है और मुल्क में कदामत पसंद ख्यालात खत्म नहीं हो पाई है | हिंदुस्तान के साबिक वज़ीर ए दाखिला के बयान को माने तो मुल्क में तकरीबन 100 मिलियन लोग, जिसमें ख्वातीन और लड़कियों की तादाद सबसे ज्यादा है, हिंदुस्तान इंसानी-तस्करी से मुतास्सिर हैं |

यह अलग बात है कि दुनिया में ऐसे कई मुल्क हैं, जिन्हें इस फहरिस्त में सबसे उरूज पर होना चाहिए था ये दुनिया के ऐसे मुल्क हैं जहां एक खातून होना ही अपने आप में मुश्किल भरा औऱ खतरनाक अमल है | इसके बावजूद हम हिंदुस्तान की हालात अच्छी नहीं मान सकते | मुल्क के हर कोने से ख्वातीन के साथ इस्तमतरेज़ी , जिंसी हरासानी, जहेज़ के लिए जलाया जाना, जिस्मानी और ज़हनी हरासानी और ख्वातीन के खरीद फरोख्त की खबर सुनने को मिलते रहते हैं |

ऐसे में खातून की हिफाज़त वाले कानून का क्या मतलब रह जाता है इसे आप और हम बेहतर तरीके से सोच और जान सकते हैं| इसलिए अगर ख्वातीन की सेक्युरिटी के लिहाज से देखा जाए तो जिस तरह के वाकियात आए दिन हिंदुस्तान में हो रही हैं उसमें ख्वातीन की सेक्युरिटी को लेकर अगर कोई रिपोर्ट आती है तो वो रिपोर्ट कहीं न कहीं खातून के सेक्युरिटी के लिए यहां उठाए जा रहे कदमों पर उंगली उठाती है |

वक्तन फवक्तन ख्वातीन के सेक्युरिटी को लेकर कानून बनाए जाते हैं और कानूनों में तब्दीली किए जाते रहे हैं फिर भी मुल्क में ख्वातीन गैर महफूज़ है, यह बेहद फिक्र की बात है |

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