गंगा की सफाई की मांग करते हुए अनिश्चितकाल भूख हड़ताल पर थे लोकप्रिय पर्यावरण कार्यकर्ता ज्ञान स्वरुप, हुई मौत

गंगा की सफाई की मांग करते हुए अनिश्चितकाल भूख हड़ताल पर थे लोकप्रिय पर्यावरण कार्यकर्ता ज्ञान स्वरुप, हुई मौत

हरिद्वार/ऋषिकेश: भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यावरण कार्यकर्ताओं में से एक, जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञान स्वरुप, जो पवित्र नदी गंगा की सफाई की मांग करते हुए अनिश्चितकाल की भूख हड़ताल पर थे, की मृत्यु हो गई है। नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे स्वरुप ने बुधवार को हरिद्वार में अपनी आखिरी सांस ली, उनके करीबी सहयोगियों ने मीडिया को सूचित किया।

करीब 111 दिनों से गंगा की स्वच्छता, अविरलता बनाए रखने के लिए गंगा कानून की मांग कर रहे स्वामी सानंद को दिल का दौरा पड़ने से ऋषिकेश AIIMS में मौत हो गई. खनन माफिया और गंगा की गंदगी और उसके साथ हो रहे खिलवाड़ का विरोध कर रहे स्वामी सानंद मातृसदन में आमरण अनशन कर रहे थे. इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा मांगें न माने जाने पर उन्होंने बुधवार से जल भी त्याग दिया था. स्वरुप ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गंगा को फिर से जीवंत करने के प्रभारी कई मंत्रियों को कई पत्र लिखे थे।

ऋषिकेश एम्स के मीडिया कॉर्डिनेर डॉ. बिजेंद्र ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि सानंद की मौत हार्ट फेल की वजह से हुई है. 111 दिन के अनशन के बाद स्वामी सानंद ने भोजन पूरी तरह से त्याग दिया था. जिसकी वजह से शरीर में काफी कमजोरी आ गई थी. जब उन्होंने एम्स लाया गया तो उन्होंने कोई भी दवा लेने से मना कर दिया. इसी वजह से दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई.

स्वामी सानंद की मौत की खबर के बाद एम्स पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का कहना था कि सरकार लगातार स्वामी सानंद से वार्ता कर रही थी. केंद्र सरकार के प्रतिनिधि भी उनके संपर्क में थे. लेकिन स्वामी सानंद अपनी सभी मांगों पर पूर्ण सहमति चाहते थे. इसी बात पर मंथन चल रहा था. सानंद की मौत काफी दुखद है. वह गंगा के लिए संघर्ष कर रहे थे. इसके साथ ही हरिद्वार एसडीएम मनीष ने भी उनकी मौत की पुष्टि की.

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