Friday , February 23 2018

गंडक नदी के सरहदी इलाकों पर हाइ अलर्ट

नेपाल के रामची गांव के नज़दिक पहाड़ का हिस्सा टूट कर गिरने से सैलाब के खतरे को देखते हुए गंडक नदी के किनारे रहनेवाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। सरहदी इलाकों पर पानी वसायल महकमा की तरफ से इंजीनियरों को तैनात कर दिया गया है। इंजीन

नेपाल के रामची गांव के नज़दिक पहाड़ का हिस्सा टूट कर गिरने से सैलाब के खतरे को देखते हुए गंडक नदी के किनारे रहनेवाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। सरहदी इलाकों पर पानी वसायल महकमा की तरफ से इंजीनियरों को तैनात कर दिया गया है। इंजीनियर पैट्रोलिंग में जुट गये हैं।

इस दरमियान चीफ़ इंजीनियर दिनेश चौधरी ने कहा है कि वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में 36 हजार पानी डिस्चार्ज पीर की शाम 4 बजे नापा गया है। इतवार की शाम 4 बजे यह डिस्चार्ज महज 15 हजार क्विसेक था। गंडक नदी में पानी का सतह एक फुट बढ़ा है। पानी की सतह अभी और बढ़ेगा। इंजीनियरों ने किसी भी खतरे से इनकार किया है।

हालांकि सरहदों के तमाम स्लुइस गेटों का बंद कर दिया गया है। सरहदों पर सीनियर इंजीनियरों से लेकर जूनियर इंजीनियर तक तैनात किये गये हैं। चीफ़ इंजीनियर ने वाजेय किया है कि नेपाल में हुए जमीन के खिसकने से कोई खतरा नहीं होगा। गंडक नदी में पानी में इजाफा होने की उम्मीद को जेहन में रखते हुए चारों तरफ अलर्ट किया गया है। यूपी के अहिरौली दान से लेकर बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर तक 156 गांवों पर सैलाब का खतरा ज़मीन खिसकने से मंडरा रहा था।

गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ने से तरबूज, खीरा, ककरी, कद्दू की फसल बरबाद हो गयी है। खेतों में पानी आने से बरौली, बैकुंठपुर, सिधवलिया, जादोपुर थाना इलाकों के तकरीबन 168 हेक्टेयर में लगायी गयी फसल बरबाद हो गयी है। दस हजार से ज़्यादा किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। किसान इस नुकसान को लेकर माथा पीट रहे हैं। उन्हें किसी तरह की उम्मीद भी अब नहीं बची है।

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