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गरीबों का रिहाइश अमीरों को, सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा

सीएजी ने झारखंड में चल रही समाजी इलाक़े की मंसूबों में भारी गड़बड़ी पकड़ी है। मंगल को एसेम्बली में वजीरे खजाना राजेंद्र प्रसाद सिंह ने माली साल 2012-2013 की ऑडिट रिपोर्ट पेश की। गैर अवामी प्रोजेक्ट से लेकर आम, इक़्तेसादी और समाजी शोबे के

सीएजी ने झारखंड में चल रही समाजी इलाक़े की मंसूबों में भारी गड़बड़ी पकड़ी है। मंगल को एसेम्बली में वजीरे खजाना राजेंद्र प्रसाद सिंह ने माली साल 2012-2013 की ऑडिट रिपोर्ट पेश की। गैर अवामी प्रोजेक्ट से लेकर आम, इक़्तेसादी और समाजी शोबे के कामकाज पर सौंपी गई यह रिपोर्ट साल 2008 से 2013 के दरमियान हुए कामों पर मारकूज है। एवान में रिपोर्ट पेश होने के बाद ऑडिट मृदुला सप्रू ने ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए नुक्तों की जानकारी दी।

समाजी सेक्युर्टी की मंसूबों में गड़बड़ी

वजीरे ऑडिट जेनरल मृदुला सप्रू ने बताया कि इंदिरा आवास मंसूबा के नफाज, देही पीने के बानी प्रोग्राम, क़ौमी ज़राई तरक़्क़ी मंसूबा, कॉमयूनिटी हेलथ सेंटर की हालत और सड़क तामीर महकमा के तहत किए गए पीपीपी मॉडल की हालत ठीक नहीं है। इन मंसबों का नफाज ठीक से नहीं किया गया। इससे जहां मंसूबा ज़मीन पर नहीं उतर सकीं, वहीं सरकारी आमदनी का नुकसान भी उठाना पड़ा। रिपोर्ट में पब्लिक अक्कौंट्स कमिटी की शिफारिश पर महकमा से कोई कार्रवाई रिपोर्ट अब तक हासिल नहीं होने के बारे मे जानकारी दी। रिपोर्ट में इस बात पर फिक्र जताई गई कि 73,310.63 करोड़ का माली तशख़ीस के फी हुकूमत मुकाममिल तौर पर लताल्लुक है। जबकि इसको लेकर कई बार हुकूमत के तमाम महकमा को लिखा गया है।

छह जिलों में मिली गड़बड़ी

एडिटर जेनरल ने रियासत के छह जिलों में इंदिरा आवास मंसूबा में गड़बड़ी पाई। देवघर जिले में बगैर ग्रामसभा के मंजूरी के ही 25,424 लाभुकों की फेहरिस्त तैयार कर ली गई। वहीं रांची और गढ़वा में जिन्हें इंदिरा आवास मिले उनके नाम बीपीएल लिस्ट में नहीं थेे। इंदिरा आवास मंसूबा में रियासत के हिस्से कम देने की वजह से झारखंड को 256.42 करोड़ के मरकज़ी हिस्से का घाटा सहना पड़ा।

हेल्थ सेंटरों का बुरा हाल

झारखंड मे शामिल कॉमयूनिटी हेल्थ सेंटर की हकीकत एडिटर जेनरल की रिपोर्ट ने खोल दी है। मंसूबा के तहत 220 हेल्थ सेंटरों की क़ायम की जानी थी लेकिन महज़ 53 सेंटर ही क़ायम हो सके। इन हेल्थ सेंटरों में डाॅक्टरों के ताईन 90 ओहदे हैं जबकि महज़ 42 डाॅक्टर ही तैनात हैं। 53 हेल्थ सेंटरों में 17 सेंटर बगैर डाॅक्टर के चल रहे हैं। यहां पारा मेडिकल स्टाफ की भी कमी है।

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